📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Election Commission of India
राजनीति
बिहार‑बंगाल SIR में मानचित्र त्रुटियों से दिल्ली मतदाता फँसे
✍️ The Hindu
🗓 20 सित. 2026, 11:15 PM
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बिहार और पश्चिम बंगाल के SIR में मानचित्र त्रुटियों के कारण दिल्ली के मतदाता मतदान केंद्र नहीं ढूँढ़ पाए, जिससे कई लोग फँस गए।
दिल्ली के चुनाव अधिकारी बताते हैं कि बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए तैयार किए गए राज्यवार एकीकृत रजिस्टर (SIR) में तकनीकी त्रुटि के कारण उन राज्यों के कई मतदाता अपने निर्धारित मतदान केंद्र नहीं ढूँढ़ पाए। मतदान के शुरुआती घंटों में जब मतदाता बूथ पर पहुँचे तो उनके नाम इलेक्ट्रॉनिक सूची में नहीं दिखे।
त्रुटि का कारण SIR डेटाबेस में उपयोग किए गए भौगोलिक निर्देशांक में असंगति है, जिससे कई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्रों को बाहर के राज्य के बूथों से जोड़ा गया। परिणामस्वरूप, दिल्ली में मतदान करने आए मतदाता गलत या दूरस्थ बूथों की ओर निर्देशित हुए, जिससे भ्रम और लंबी कतारें बन गईं।
दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी ने इस समस्या को स्वीकार किया और बूथ स्तर के कर्मचारियों को डेटा सुधार तक मतदाता की पहचान मैन्युअल रूप से जांचने का निर्देश दिया। प्रभावित मतदाताओं की मदद के लिए अतिरिक्त सहायक तैनात किए गए और निकटतम कार्यशील बूथ की जानकारी देने के लिए एक अस्थायी हेल्पलाइन भी स्थापित की गई।
पर्यवेक्षकों ने कहा कि जबकि यह गड़बड़ी सीमित संख्या में मतदाताओं को प्रभावित करती है, यह भविष्य के चुनावों में मतदाता‑मैपिंग सॉफ़्टवेयर की अधिक कठोर जांच की आवश्यकता को उजागर करती है।
त्रुटि का कारण SIR डेटाबेस में उपयोग किए गए भौगोलिक निर्देशांक में असंगति है, जिससे कई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्रों को बाहर के राज्य के बूथों से जोड़ा गया। परिणामस्वरूप, दिल्ली में मतदान करने आए मतदाता गलत या दूरस्थ बूथों की ओर निर्देशित हुए, जिससे भ्रम और लंबी कतारें बन गईं।
दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी ने इस समस्या को स्वीकार किया और बूथ स्तर के कर्मचारियों को डेटा सुधार तक मतदाता की पहचान मैन्युअल रूप से जांचने का निर्देश दिया। प्रभावित मतदाताओं की मदद के लिए अतिरिक्त सहायक तैनात किए गए और निकटतम कार्यशील बूथ की जानकारी देने के लिए एक अस्थायी हेल्पलाइन भी स्थापित की गई।
पर्यवेक्षकों ने कहा कि जबकि यह गड़बड़ी सीमित संख्या में मतदाताओं को प्रभावित करती है, यह भविष्य के चुनावों में मतदाता‑मैपिंग सॉफ़्टवेयर की अधिक कठोर जांच की आवश्यकता को उजागर करती है।