📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Senior Chief Petty Officer Susan Hammond
रक्षा
मेजर नव्या शेखावत बनी राष्ट्रपति की पहली महिला सेना एडीसी
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 18 सित. 2026, 03:36 PM
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मेजर नव्या शेखावत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए पहली महिला सेना एडीसी बनकर इतिहास रचा।
मेजर नव्या शेखावत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए पहली महिला सेना एडीसी बनकर इतिहास रचा। यह नियुक्ति सोमवार को राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा नई दिल्ली में घोषित की गई और वह राष्ट्रपति के वरिष्ठ सैन्य सहायक के रूप में कार्य करेंगी, आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लेंगी और सैन्य समारोहों में सेना का प्रतिनिधित्व करेंगी।
उन्होंने 2008 में भारतीय सेना में नियुक्ति पाई और विभिन्न कमांड व स्टाफ पदों पर कार्य किया, जिसमें सिख रेजिमेंट की 8वीं बैटालियन में सेवा भी शामिल है। यह नियुक्ति उनके लंबे समर्पण और नेतृत्व के करियर के बाद आई है, और वह राजस्थान की एक प्रमुख सिख परिवार की बेटी हैं।
सैन्य एडीसी की भूमिका मुख्यतः औपचारिक है, परंतु यह अत्यधिक प्रतिष्ठा रखती है, जिसमें राष्ट्रपति के सैन्य कार्यक्रमों का समन्वय और सेना तथा राज्य प्रमुख के बीच संपर्क का कार्य शामिल है। यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा पहले महिला रक्षा प्रमुख की नियुक्ति के बाद आई है, जो भारत की सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
उन्होंने आभार व्यक्त किया और पद की गरिमा बनाए रखने का वादा किया। यह नियुक्ति भारतीय सैन्य में लैंगिक समानता के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
उन्होंने 2008 में भारतीय सेना में नियुक्ति पाई और विभिन्न कमांड व स्टाफ पदों पर कार्य किया, जिसमें सिख रेजिमेंट की 8वीं बैटालियन में सेवा भी शामिल है। यह नियुक्ति उनके लंबे समर्पण और नेतृत्व के करियर के बाद आई है, और वह राजस्थान की एक प्रमुख सिख परिवार की बेटी हैं।
सैन्य एडीसी की भूमिका मुख्यतः औपचारिक है, परंतु यह अत्यधिक प्रतिष्ठा रखती है, जिसमें राष्ट्रपति के सैन्य कार्यक्रमों का समन्वय और सेना तथा राज्य प्रमुख के बीच संपर्क का कार्य शामिल है। यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा पहले महिला रक्षा प्रमुख की नियुक्ति के बाद आई है, जो भारत की सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
उन्होंने आभार व्यक्त किया और पद की गरिमा बनाए रखने का वादा किया। यह नियुक्ति भारतीय सैन्य में लैंगिक समानता के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।