📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / A.Savin
राजनीति
महाराष्ट्र सरकार ने एफएसएसएआई के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की
✍️ Business Standard
🗓 04 नव. 2026, 04:01 AM
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महाराष्ट्र सरकार ने फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के हालिया निर्णय को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (एफएसएसएआई) के हालिया आदेश के विरुद्ध न्यायिक समीक्षा की याचिका दायर की है। सरकार का कहना है कि केंद्रिय नियामक का यह कदम राज्य की खाद्य‑संबंधी अधिकारिता में हस्तक्षेप करता है और मौजूदा राज्य नीतियों को बाधित कर सकता है।
याचिका में बताया गया है कि एफएसएसएआई का निर्देश राज्य के अपने खाद्य‑सुरक्षा ढांचे के साथ असंगत है, जिससे स्थानीय प्राधिकरणों और व्यवसायों के लिए प्रशासनिक उलझन पैदा हो रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सार्वजनिक स्वास्थ्य और वाणिज्य से जुड़े नियामक अधिकारों के संतुलन को निर्धारित कर सकता है। यदि न्यायालय महाराष्ट्र के पक्ष में निर्णय देता है तो भविष्य में एफएसएसएआई के निर्देशों की सीमा घट सकती है, जबकि नियामक के पक्ष में निर्णय उसकी राष्ट्रीय अधिकारिता को सुदृढ़ करेगा।
एफएसएसएआई ने अभी तक इस याचिका पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फ़ैसला देगा, जिसकी अपेक्षा अगले कुछ हफ्तों में की जा रही है।
इस निर्णय को खाद्य उत्पादकों और रिटेलर्स सहित सभी उद्योग हितधारकों द्वारा बारीकी से देखा जाएगा, क्योंकि यह पूरे देश में अनुपालन आवश्यकताओं को प्रभावित कर सकता है।
याचिका में बताया गया है कि एफएसएसएआई का निर्देश राज्य के अपने खाद्य‑सुरक्षा ढांचे के साथ असंगत है, जिससे स्थानीय प्राधिकरणों और व्यवसायों के लिए प्रशासनिक उलझन पैदा हो रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सार्वजनिक स्वास्थ्य और वाणिज्य से जुड़े नियामक अधिकारों के संतुलन को निर्धारित कर सकता है। यदि न्यायालय महाराष्ट्र के पक्ष में निर्णय देता है तो भविष्य में एफएसएसएआई के निर्देशों की सीमा घट सकती है, जबकि नियामक के पक्ष में निर्णय उसकी राष्ट्रीय अधिकारिता को सुदृढ़ करेगा।
एफएसएसएआई ने अभी तक इस याचिका पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फ़ैसला देगा, जिसकी अपेक्षा अगले कुछ हफ्तों में की जा रही है।
इस निर्णय को खाद्य उत्पादकों और रिटेलर्स सहित सभी उद्योग हितधारकों द्वारा बारीकी से देखा जाएगा, क्योंकि यह पूरे देश में अनुपालन आवश्यकताओं को प्रभावित कर सकता है।