📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Andrew Campbell
अपराध
महाराष्ट्र साइबर सेल ने इन्फ्लुएंसर सानिया मिस्त्री के डीपफेक केस में कार्रवाई शुरू की
✍️ Mid-Day
🗓 17 अक्टू. 2026, 05:49 AM
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महाराष्ट्र साइबर सेल ने ऑनलाइन सर्कुलेट हुए सानिया मिस्त्री की डीपफेक वीडियो के संबंध में प्राप्त शिकायत पर जांच शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र साइबर सेल ने एक शिकायत के बाद औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसमें कहा गया है कि इन्फ्लुएंसर सानिया मिस्त्री की डीपफेक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर फैलायी जा रही है। यह वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से निर्मित है और उनके व्यक्तित्व को गलत रूप में प्रस्तुत करता है।
प्राप्त शिकायत के आधार पर, अधिकारियों ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की उन धाराों के तहत मामला दर्ज किया है जो डिजिटल सामग्री के बनावट और प्रसार को प्रतिबंधित करती हैं। जांच में वीडियो के स्रोत का पता लगाना, निर्माण में शामिल व्यक्तियों या समूहों की पहचान करना और संभावित कानूनी उल्लंघनों का मूल्यांकन करना शामिल होगा।
यह कदम भारत में डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है, विशेषकर जब सार्वजनिक हस्तियों को लक्षित किया जाता है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है, पर साइबर सेल ने बताया कि वह प्लेटफ़ॉर्म प्रदाताओं के साथ मिलकर इस सामग्री को हटाने और आगे के प्रसार को रोकने का प्रयास करेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में डीपफेक मामलों की न्यायिक प्रक्रिया अभी विकसित हो रही है, और परिणाम अक्सर इरादा और वास्तविक नुकसान सिद्ध करने पर निर्भर करते हैं। जांच जारी है और आगे की जानकारी मिलने पर अपडेट दिया जाएगा।
प्राप्त शिकायत के आधार पर, अधिकारियों ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की उन धाराों के तहत मामला दर्ज किया है जो डिजिटल सामग्री के बनावट और प्रसार को प्रतिबंधित करती हैं। जांच में वीडियो के स्रोत का पता लगाना, निर्माण में शामिल व्यक्तियों या समूहों की पहचान करना और संभावित कानूनी उल्लंघनों का मूल्यांकन करना शामिल होगा।
यह कदम भारत में डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है, विशेषकर जब सार्वजनिक हस्तियों को लक्षित किया जाता है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है, पर साइबर सेल ने बताया कि वह प्लेटफ़ॉर्म प्रदाताओं के साथ मिलकर इस सामग्री को हटाने और आगे के प्रसार को रोकने का प्रयास करेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में डीपफेक मामलों की न्यायिक प्रक्रिया अभी विकसित हो रही है, और परिणाम अक्सर इरादा और वास्तविक नुकसान सिद्ध करने पर निर्भर करते हैं। जांच जारी है और आगे की जानकारी मिलने पर अपडेट दिया जाएगा।