📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prateek Priyadeep
धर्म
उज्जैन में महाकाल की पहली भादौ सवारी, 84 महादेव की झांकियों के साथ
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 30 अग. 2026, 07:33 PM
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उज्जैन में भादौ माह की पहली महाकाल यात्रा सोमवार को शुरू, वर्ष की पाँचवीं सवारी, बाबा महाकाल के पाँच स्वरूप और 84 महादेव की झांकियों के साथ।
उज्जैन, मध्य प्रदेश – सोमवार को भादौ माह की पहली महाकाल यात्रा शुरू होगी, जो इस वर्ष की पाँचवीं सवारी भी है। यह धार्मिक आयोजन शहर के भक्तों को एकत्रित कर महाकाल से आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है।
यात्रा में बाबा महाकाल के पाँच अलग‑अलग स्वरूप प्रदर्शित किए जाएंगे, जो देवता की बहुआयामी प्रकृति को दर्शाते हैं। प्रत्येक स्वरूप निर्धारित बिंदुओं पर दिखाया जाएगा, जिससे श्रद्धालु विभिन्न रूपों में पूजा का अनुभव कर सकेंगे।
साथ ही यात्रा में 84 महादेव की झांकियां लगाई जाएंगी, जिन्हें स्थानीय भाषा में "महादेव की झांकी" कहा जाता है। ये दृश्यात्मक प्रस्तुतियां आध्यात्मिक माहौल को समृद्ध करने और शिव की कथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने के लिए स्थापित की गई हैं।
आयोजनकर्ता ने प्रमुख शहर के स्थलों को कवर करने के लिए मार्ग निर्धारित किया है, जिससे बड़ी संख्या में लोग भाग ले सकें। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
महाकाल की इस सवारी से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेने की उम्मीद है, जिससे भादौ माह में उज्जैन का तीर्थस्थल के रूप में महत्व और भी स्पष्ट हो जाता है।
यात्रा में बाबा महाकाल के पाँच अलग‑अलग स्वरूप प्रदर्शित किए जाएंगे, जो देवता की बहुआयामी प्रकृति को दर्शाते हैं। प्रत्येक स्वरूप निर्धारित बिंदुओं पर दिखाया जाएगा, जिससे श्रद्धालु विभिन्न रूपों में पूजा का अनुभव कर सकेंगे।
साथ ही यात्रा में 84 महादेव की झांकियां लगाई जाएंगी, जिन्हें स्थानीय भाषा में "महादेव की झांकी" कहा जाता है। ये दृश्यात्मक प्रस्तुतियां आध्यात्मिक माहौल को समृद्ध करने और शिव की कथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने के लिए स्थापित की गई हैं।
आयोजनकर्ता ने प्रमुख शहर के स्थलों को कवर करने के लिए मार्ग निर्धारित किया है, जिससे बड़ी संख्या में लोग भाग ले सकें। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
महाकाल की इस सवारी से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेने की उम्मीद है, जिससे भादौ माह में उज्जैन का तीर्थस्थल के रूप में महत्व और भी स्पष्ट हो जाता है।