📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann Forget
बिज़नेस
मध्यप्रदेश के व्यापारी 23 सितंबर को 'नो यूपीआई डे' मनाने का इरादा
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 22 सित. 2026, 06:31 PM
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मध्यप्रदेश के व्यापारी 23 सितंबर को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन‑देनों पर प्रस्तावित 0.4% एमडीआर के विरोध में "नो यूपीआई डे" मनाने की तैयारी कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश के व्यापारी 23 सितंबर को "नो यूपीआई डे" मनाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे प्रस्तावित 0.4% एमडीआर के खिलाफ अपना विरोध जताया जा सके। यह शुल्क 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन‑देनों पर लागू होगा।
यदि यह एमडीआर लागू हो जाता है, तो छोटे‑मध्यम उद्यमों की डिजिटल भुगतान लागत बढ़ जाएगी, क्योंकि कई खुदरा, खाद्य सेवा और स्थानीय बाजारों में लेन‑देन की राशि अक्सर इस सीमा से ऊपर होती है। व्यापारी इस अतिरिक्त खर्च को अपने कम मार्जिन पर भारी बोझ मान रहे हैं।
व्यापारियों ने राज्य अधिकारियों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) से शुल्क संरचना पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है, यह तर्क देते हुए कि यूपीआई की सफलता कम‑से‑कम लागत मॉडल पर निर्भर करती है। अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जिससे व्यापारी तय करेंगे कि निर्धारित दिन लेन‑देन पर प्रभाव पड़ेगा या नहीं।
यह कदम नीति निर्माताओं और व्यापारियों के बीच बढ़ती टकराव को उजागर करता है, जहाँ डिजिटल भुगतान से राजस्व जुटाने की कोशिशें और कम‑लागत वाली यूपीआई सुविधा के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
यदि यह एमडीआर लागू हो जाता है, तो छोटे‑मध्यम उद्यमों की डिजिटल भुगतान लागत बढ़ जाएगी, क्योंकि कई खुदरा, खाद्य सेवा और स्थानीय बाजारों में लेन‑देन की राशि अक्सर इस सीमा से ऊपर होती है। व्यापारी इस अतिरिक्त खर्च को अपने कम मार्जिन पर भारी बोझ मान रहे हैं।
व्यापारियों ने राज्य अधिकारियों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) से शुल्क संरचना पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है, यह तर्क देते हुए कि यूपीआई की सफलता कम‑से‑कम लागत मॉडल पर निर्भर करती है। अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जिससे व्यापारी तय करेंगे कि निर्धारित दिन लेन‑देन पर प्रभाव पड़ेगा या नहीं।
यह कदम नीति निर्माताओं और व्यापारियों के बीच बढ़ती टकराव को उजागर करता है, जहाँ डिजिटल भुगतान से राजस्व जुटाने की कोशिशें और कम‑लागत वाली यूपीआई सुविधा के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।