📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
टेक्नोलॉजी
एमपी हाईकोर्ट ने RBI को धोखाधड़ी वाले एटीएम निकासी पर कड़ी रोक लगाने का आग्रह किया
✍️ Amar Ujala · Jabalpur
🗓 08 सित. 2026, 10:41 PM
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एमपी हाईकोर्ट ने संदिग्ध खातों से साइबर ठगी की रकम एटीएम से निकलने पर चिंता जताई और बड़ी या संदिग्ध निकासी में बायोमेट्रिक व चेहरा पहचान तकनीक अपनाने की सलाह दी।
जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह बताया कि साइबर ठगी से जुड़े खातों से बड़ी रकम एटीएम के माध्यम से निकाली जा रही है, जिससे बैंकिंग सुरक्षा में खामियों का खुलासा हुआ है। कोर्ट ने मौजूदा प्रमाणीकरण प्रक्रिया को अपर्याप्त बताया और इसे धोखेबाजों द्वारा शोषित किया जा रहा है।
न्यायालय ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को बड़े या संदिग्ध लेन‑देन के लिए बायोमेट्रिक, चेहरा पहचान तकनीक और अतिरिक्त प्रमाणीकरण को अपनाने का सुझाव दिया। यह सुझाव निकासी सीमा और सत्यापन प्रक्रिया को सुदृढ़ करने की दिशा में है।
यह सिफ़ारिश राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल भुगतान सुरक्षा को कड़ा करने के प्रयासों के साथ मेल खाती है, जहाँ हाल ही में कई साइबर‑धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। पहले भी RBI ने दो‑स्तरीय प्रमाणीकरण के दिशा‑निर्देश जारी किए थे, पर कोर्ट ने अधिक उन्नत पहचान‑आधारित नियंत्रणों की मांग की है।
यदि लागू किया गया, तो ये उपाय एटीएम निकासी के तरीके को बदल सकते हैं और ठगी से जुड़े धन के प्रवाह को रोकने में मदद करेंगे। अभी तक RBI ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर कोर्ट की टिप्पणियों को आगामी नियामक सुधारों में शामिल किया जा सकता है।
न्यायालय ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को बड़े या संदिग्ध लेन‑देन के लिए बायोमेट्रिक, चेहरा पहचान तकनीक और अतिरिक्त प्रमाणीकरण को अपनाने का सुझाव दिया। यह सुझाव निकासी सीमा और सत्यापन प्रक्रिया को सुदृढ़ करने की दिशा में है।
यह सिफ़ारिश राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल भुगतान सुरक्षा को कड़ा करने के प्रयासों के साथ मेल खाती है, जहाँ हाल ही में कई साइबर‑धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। पहले भी RBI ने दो‑स्तरीय प्रमाणीकरण के दिशा‑निर्देश जारी किए थे, पर कोर्ट ने अधिक उन्नत पहचान‑आधारित नियंत्रणों की मांग की है।
यदि लागू किया गया, तो ये उपाय एटीएम निकासी के तरीके को बदल सकते हैं और ठगी से जुड़े धन के प्रवाह को रोकने में मदद करेंगे। अभी तक RBI ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर कोर्ट की टिप्पणियों को आगामी नियामक सुधारों में शामिल किया जा सकता है।