📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Henry Cousens (1893)
अपराध
एमपी हाईकोर्ट ने दमोह हत्या मामले में आजीवन सजा रद्द, आरोपी को बरी किया
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 05 सित. 2026, 01:02 PM
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जबलपुर हाईकोर्ट ने दमोह के हत्या मामले में ट्रायल कोर्ट की आजीवन सजा रद्द कर दी, क्योंकि निष्कर्ष एफएसएल रिपोर्ट के विपरीत पाए गए, और आरोपी को बरी कर दिया।
जबलपुर हाईकोर्ट ने दो‑जज युगलपीठ के रूप में दमोह, मध्य प्रदेश के एक हत्या मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद फ़ॉरेन्सिक साइंस लैब (एफएसएल) रिपोर्ट के विपरीत निष्कर्ष दर्ज किए थे।
निर्णय में हाईकोर्ट ने वैज्ञानिक साक्ष्य के साथ न्यायिक निष्कर्षों के मेल की महत्ता पर बल दिया, और इस विसंगति को प्रक्रिया में त्रुटि माना। परिणामस्वरूप, आजीवन सजा प्राप्त आरोपी को दोषमुक्त घोषित कर जेल से रिहा कर दिया गया।
यह कदम न्यायिक प्रणाली में निचली अदालत के फैसलों की जाँच‑परख को सुदृढ़ करता है, विशेषकर जब फ़ॉरेन्सिक साक्ष्य के साथ असंगतता हो। इस आदेश में पीड़िता, कारण या आरोपी के नाम जैसी अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की हाईकोर्ट की दखलअंदाज़ी न्यायिक प्रणाली में संतुलन बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि दोषसिद्धि विश्वसनीय और प्रमाणित साक्ष्य पर आधारित हो।
निर्णय में हाईकोर्ट ने वैज्ञानिक साक्ष्य के साथ न्यायिक निष्कर्षों के मेल की महत्ता पर बल दिया, और इस विसंगति को प्रक्रिया में त्रुटि माना। परिणामस्वरूप, आजीवन सजा प्राप्त आरोपी को दोषमुक्त घोषित कर जेल से रिहा कर दिया गया।
यह कदम न्यायिक प्रणाली में निचली अदालत के फैसलों की जाँच‑परख को सुदृढ़ करता है, विशेषकर जब फ़ॉरेन्सिक साक्ष्य के साथ असंगतता हो। इस आदेश में पीड़िता, कारण या आरोपी के नाम जैसी अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की हाईकोर्ट की दखलअंदाज़ी न्यायिक प्रणाली में संतुलन बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि दोषसिद्धि विश्वसनीय और प्रमाणित साक्ष्य पर आधारित हो।