📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
अपराध
एमपी हाईकोर्ट ने तीरथ ‘छोटू टेकाम’ को डीएनए असंगति के कारण रैप केस से बरी किया
✍️ Amar Ujala · Jabalpur
🗓 21 सित. 2026, 08:00 AM
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एमपी हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा वाले तीरथ उर्फ छोटू टेकाम को डीएनए रिपोर्ट में नवजात से मिलान न होने के कारण बरी कर दिया, तकनीकी साक्ष्य की कमी को कारण बताया।
एमपी हाईकोर्ट ने मंगलवार को तीरथ उर्फ छोटू टेकाम को रैप केस में 10 साल की सजा से मुक्त कर दिया। अदालत ने यह निर्णय एक डीएनए परीक्षण के आधार पर लिया, जिसमें आरोपी और नवजात शिशु के बीच कोई आनुवंशिक मिलान नहीं पाया गया।
जिला न्यायालय ने पहले इस मामले में टेकाम को दस साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, यह मानते हुए कि बच्चा उस हमले का परिणाम था।
अपील के दौरान प्रस्तुत फॉरेन्सिक रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी के डीएनए और शिशु के डीएनए में कोई समानता नहीं है। तकनीकी साक्ष्य की कमी को देखते हुए, न्यायालय ने संदेह के लाभ के सिद्धांत को लागू कर आरोपी को बरी कर दिया।
कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला यौन अपराधों में वैज्ञानिक सबूतों की महत्ता को रेखांकित करता है।
जिला न्यायालय ने पहले इस मामले में टेकाम को दस साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, यह मानते हुए कि बच्चा उस हमले का परिणाम था।
अपील के दौरान प्रस्तुत फॉरेन्सिक रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी के डीएनए और शिशु के डीएनए में कोई समानता नहीं है। तकनीकी साक्ष्य की कमी को देखते हुए, न्यायालय ने संदेह के लाभ के सिद्धांत को लागू कर आरोपी को बरी कर दिया।
कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला यौन अपराधों में वैज्ञानिक सबूतों की महत्ता को रेखांकित करता है।