📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendrasinghchauha…
अपराध
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बागेश्वर धाम दुष्कर्म मामले में आरोपी की दूसरी जमानत याचिका खारिज, एसआईटी का आदेश
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 05 अक्टू. 2026, 10:01 PM
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राजू जाटव की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर बागेश्वर धाम में नाबालिग दुष्कर्म की जांच के लिए एसआईटी गठन का आदेश दिया।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बागेश्वर धाम में नाबालिग के खिलाफ दुष्कर्म का आरोपित राजू जाटव की दूसरी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता और चल रहे जांच को देखते हुए आरोपी को हिरासत में रखना आवश्यक है।
जमानत खारिज करने के साथ ही कोर्ट ने एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया। इस टीम को दुष्कर्म की घटनाओं की सच्चाई और गर्भ में मौजूद भ्रूण के जैविक पिता की पहचान की जांच करने का काम सौंपा गया है।
एसआईटी के गठन से मामले की गहन और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का उद्देश्य है, क्योंकि यह मामला नाबालिगों के खिलाफ अपराधों और धार्मिक स्थलों में सुरक्षा के मुद्दों को उजागर करता है। अधिकारियों को अगले कुछ दिनों में टीम का चयन कर कोर्ट को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों पर न्यायिक सख्ती को दर्शाता है, विशेषकर जब मामला धार्मिक स्थल से जुड़ा हो। अब नई बनाई गई टीम की निगरानी में जांच आगे बढ़ेगी, जिससे स्पष्टता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
जमानत खारिज करने के साथ ही कोर्ट ने एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया। इस टीम को दुष्कर्म की घटनाओं की सच्चाई और गर्भ में मौजूद भ्रूण के जैविक पिता की पहचान की जांच करने का काम सौंपा गया है।
एसआईटी के गठन से मामले की गहन और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का उद्देश्य है, क्योंकि यह मामला नाबालिगों के खिलाफ अपराधों और धार्मिक स्थलों में सुरक्षा के मुद्दों को उजागर करता है। अधिकारियों को अगले कुछ दिनों में टीम का चयन कर कोर्ट को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों पर न्यायिक सख्ती को दर्शाता है, विशेषकर जब मामला धार्मिक स्थल से जुड़ा हो। अब नई बनाई गई टीम की निगरानी में जांच आगे बढ़ेगी, जिससे स्पष्टता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।