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शिक्षा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 1998‑2005 में नियुक्त 99,000 शिक्षकों को पुरानी पेंशन का आदेश दिया
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 08 नव. 2026, 01:01 PM
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ग्वालियर पीठ ने 1998‑2005 में नियुक्त लगभग 99,000 शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना के तहत लाभ देने और एनपीएस राशि को ओपीएस में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ग्वालियर पीठ ने लगभग 99,000 शिक्षकों को, जो 1998 से 2005 के बीच नियुक्त हुए थे, पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत लाभ मिलने का आदेश दिया। अदालत ने यह निर्देश दिया कि इन शिक्षकों के एनपीएस खातों में जमा राशि को ओपीएस में स्थानांतरित किया जाए, जिससे उन्हें वह पेंशन मिल सके जिसकी वे मांग कर रहे थे।
राज्य सरकार की इस वर्ग को ओपीएस नहीं देने की दलील को खारिज कर दिया गया, क्योंकि पीठ ने पाया कि सरकार का तर्क अपर्याप्त था। न्यायाधीशों ने कहा कि दो दशकों से अधिक सेवा करने वाले शिक्षकों को उस पेंशन ढांचे से वंचित नहीं किया जा सकता, जो उनके भर्ती के समय लागू था।
यह निर्णय मध्य प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि राज्य को अब बड़ी संख्या में वर्तमान और सेवानिवृत्त शिक्षकों के लिए ओपीएस की देनदारी को पूरा करना होगा। राज्य सरकार को इस स्थानांतरण को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा विभाग और शिक्षकों के संघों ने इस फैसले का स्वागत किया, इसे वरिष्ठ शिक्षकों के लिए कई वर्षों से प्रतीक्षित राहत बताया। अदालत ने राज्य को स्थानांतरण प्रक्रिया का विस्तृत शेड्यूल प्रकाशित करने का भी आदेश दिया, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
स्थानांतरण की समयसीमा और पेंशन की सटीक राशि के बारे में विवरण राज्य पेंशन विभाग जल्द ही जारी करेगा।
राज्य सरकार की इस वर्ग को ओपीएस नहीं देने की दलील को खारिज कर दिया गया, क्योंकि पीठ ने पाया कि सरकार का तर्क अपर्याप्त था। न्यायाधीशों ने कहा कि दो दशकों से अधिक सेवा करने वाले शिक्षकों को उस पेंशन ढांचे से वंचित नहीं किया जा सकता, जो उनके भर्ती के समय लागू था।
यह निर्णय मध्य प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि राज्य को अब बड़ी संख्या में वर्तमान और सेवानिवृत्त शिक्षकों के लिए ओपीएस की देनदारी को पूरा करना होगा। राज्य सरकार को इस स्थानांतरण को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा विभाग और शिक्षकों के संघों ने इस फैसले का स्वागत किया, इसे वरिष्ठ शिक्षकों के लिए कई वर्षों से प्रतीक्षित राहत बताया। अदालत ने राज्य को स्थानांतरण प्रक्रिया का विस्तृत शेड्यूल प्रकाशित करने का भी आदेश दिया, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
स्थानांतरण की समयसीमा और पेंशन की सटीक राशि के बारे में विवरण राज्य पेंशन विभाग जल्द ही जारी करेगा।