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31 अक्टू. 2026•
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मंडी पहुंचे कलेक्टर, सचिव नहीं बता पाए 28 अक्टूबर को कितने ट्रैक्टर आए

✍️ रिपोर्टर: Arvind Sen 🗓 31 अक्टू. 2026, 09:04 AM 👁 21
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अशोकनगर। अचानक कृषि मंडी पहुंचे कलेक्टर साकेत मालवीय अव्यवस्थाओं व गड़बड़ियों पर भड़क गए। बीच सड़क पर ही मंडी सचिव को जमकर फटकार लगाई। नाराजगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कलेक्टर ने तहसीलदार से कह दिया कि इन्हें गाड़ी में बिठाओ और जब तक पूरी जानकारी न दे दें, तब तक छोड़ना मत। इससे मंडी प्रशासन में हड़कंप मच गया और सन्नाटा छा गया, तो वहीं किसानों में खुशी नजर आई।
कलेक्टर शुक्रवार को शहर की नवीन कृषि उपज मंडी का निरीक्षण करने पहुंचे थे। यहां उन्होंने मंडी सचिव प्रेमकुमार मीणा से अनाज बेचने आने वाले और बेचकर जाने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के प्रवेश व निकासी का तारीखवार हिसाब मांगा। कलेक्टर ने पूछा कि 28 अक्टूबर को मंडी में कितने वाहन आए, किनकी नीलामी हुई और कौन बिना नीलामी के रह गए, इसका पूरा ब्योरा दें।
लेकिन जब सचिव जानकारी नहीं दे पाए तो कलेक्टर नाराज हो गए।
मंडी सचिव मीणा ने जब रजिस्टर मंगाने और जानकारी जुटाने में समय लगने की बात कही और लगभग में आंकड़े बताने की कोशिश की, तो कलेक्टर ने झिड़काते हुए कहा, "कोई फालतू बात नहीं, मुझे कोई कहानी नहीं सुननी है। तुम्हारे कैंपस में कितनी ट्रॉलियां आईं और कितनी गईं, मुझे सटीक हिसाब दो। तुम अपना काम ही नहीं कर सकते। हर गेट पर आदमी लगाओ, ताले लगवाओ, कौन सी ट्रॉली आ रही है और कौन सी जा रही है, इसकी एंट्री होनी चाहिए। शनिवार को भी कहा था तो काम क्यों नहीं हुआ? याद में सचिव ने फोन लगाकर आनन-फानन में रजिस्टर मंगाए और कलेक्टर ने जानकारी देखी।"
सिटिंग से हुआ था फर्जीवाड़े का खुलासा: जहां सैकड़ों किसान कई-कई दिन से ट्रैक्टर-ट्रॉली रोके हुए थे, वहीं मंडी में कर्मचारी, दलाल व व्यापारी मिलकर किस तरह से किसानों को चूना लगा रहे हैं, इसका खुलासा भीहुआ।
यह दिए निर्देश
मंडी परिसर में स्थित सभी ट्यूबवेलों पर किसानों को पानी की उपलब्धता के लिए हैंडपंप स्थापित किए जाएं, ताकि पेयजल सुलभ हो।
मंडी में आने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के आने-जाने का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखें। साथ ही यह भी दर्ज करें कि कौन सी ट्रॉली किस शेड में लगी।
मंडी परिसर में ट्रॉलियों को कतारबद्ध तरीके से रखा जाए और उपज की नीलामी समय से कराई जाए, ताकि किसान परेशान न हों।
किसानों और हम्मालों को पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था हो, ताकि उन्हें पानी के लिए परेशानियों का सामना न करना पड़े।
सिटिंग में हुआ था खुलासा: पत्रिका ने 28 अक्टूबर को 'दलाल को 300 रुपए दो, लाइन तोड़ो व बिना बोली तौल कराओ'
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