Politics
लखनऊ: भाजपा विधायक जय देवी कौशल को मंदिर में पूजा से रोकने का आरोप, जातीय भेदभाव पर छिड़ी बहस
Watch on:
📷 Instagram
काकोरी से भाजपा विधायक जय देवी कौशल ने मंदिर में पूजा करने से रोके जाने का आरोप लगाया है, जिससे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक विवाद गहरा गया है।
लखनऊ के काकोरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक जय देवी कौशल ने एक मंदिर में पूजा-अर्चना करने से रोके जाने का गंभीर आरोप लगाया है। विधायक का दावा है कि उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि स्वीकृत कराई थी, लेकिन जब वे वहां पहुंचीं तो उन्हें उनकी जाति का हवाला देकर पूजा करने से रोका गया। इस घटना के बाद से क्षेत्र में जातीय भेदभाव और राजनीतिक सवालों को लेकर बहस तेज हो गई है।
विधायक जय देवी कौशल पासी समाज से आती हैं और उनके पति कौशल किशोर पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ हुए इस कथित व्यवहार ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि एक विधायक के साथ धार्मिक स्थल पर ऐसा बर्ताव हो सकता है, तो आम दलित और वंचित समाज के लोगों की स्थिति क्या होगी। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहां लोग इसे समाज के सम्मान और अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं।
इस प्रकरण के बीच आगामी विधानसभा चुनाव में विधायक को टिकट मिलने की संभावनाओं को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, भाजपा की ओर से टिकट को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। फिलहाल, मंदिर प्रबंधन और पुजारियों का पक्ष आना बाकी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि क्या सरकारी धन से विकसित धार्मिक स्थलों पर जातिगत दीवारें अभी भी कायम हैं।
विधायक जय देवी कौशल पासी समाज से आती हैं और उनके पति कौशल किशोर पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ हुए इस कथित व्यवहार ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि एक विधायक के साथ धार्मिक स्थल पर ऐसा बर्ताव हो सकता है, तो आम दलित और वंचित समाज के लोगों की स्थिति क्या होगी। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहां लोग इसे समाज के सम्मान और अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं।
इस प्रकरण के बीच आगामी विधानसभा चुनाव में विधायक को टिकट मिलने की संभावनाओं को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, भाजपा की ओर से टिकट को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। फिलहाल, मंदिर प्रबंधन और पुजारियों का पक्ष आना बाकी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि क्या सरकारी धन से विकसित धार्मिक स्थलों पर जातिगत दीवारें अभी भी कायम हैं।