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लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओविषय पर गोष्ठी का आयोजन
पटनासिटी के मंगल तालाब में प्रबुद्ध जन समिति कि ओर से पतलीपुत्र परिषद में लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ, विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया
पटना सिटी से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट
लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विषय पर संगोष्ठी में लोकतांत्रिक मूल्यों पर हुई चर्चा,
पटना सिटी के मंगल तालाब स्थित रविवार को प्रबुद्ध जन समिति की ओर से पाटलिपुत्र परिषद में लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में सत्तारूढ़ दल के सचेतक सह पटना साहिब के विधायक रत्नेश कुमार ,बिहार किसान आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण मेहता ,प्रेम रंजन चतुर्वेदी जी, मोहन चतुर्वेदी, दिनेश पटेल , नवीन सिन्हा ने अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था, सामाजिक जिम्मेदारी, नागरिक अधिकारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तारपूर्वक अपनी बातें रखीं। संगोष्ठी के दौरान इस बात पर भी विचार-विमर्श हुआ कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदार भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रबुद्धजनों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। ऐसे आयोजन समाज में वैचारिक जागरूकता बढ़ाने, सकारात्मक संवाद स्थापित करने और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति नागरिकों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी, विचारों की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विषय पर संगोष्ठी में लोकतांत्रिक मूल्यों पर हुई चर्चा,
पटना सिटी के मंगल तालाब स्थित रविवार को प्रबुद्ध जन समिति की ओर से पाटलिपुत्र परिषद में लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में सत्तारूढ़ दल के सचेतक सह पटना साहिब के विधायक रत्नेश कुमार ,बिहार किसान आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण मेहता ,प्रेम रंजन चतुर्वेदी जी, मोहन चतुर्वेदी, दिनेश पटेल , नवीन सिन्हा ने अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था, सामाजिक जिम्मेदारी, नागरिक अधिकारों और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तारपूर्वक अपनी बातें रखीं। संगोष्ठी के दौरान इस बात पर भी विचार-विमर्श हुआ कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदार भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रबुद्धजनों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। ऐसे आयोजन समाज में वैचारिक जागरूकता बढ़ाने, सकारात्मक संवाद स्थापित करने और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति नागरिकों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी, विचारों की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।