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30 जून 2026
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लिव-इन पार्टनर से शादी से इनकार, बलात्कार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Amiyashrivastava (talk) (Uploads)
अपराध

लिव-इन पार्टनर से शादी से इनकार, बलात्कार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

✍️ Bar and Bench 🗓 30 जून 2026, 05:32 AM 👁 4

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि लंबे समय से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे साथी से शादी करने से इनकार करना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद भी, किसी पुरुष द्वारा अपनी साथी से शादी करने से इनकार करना स्वतः ही बलात्कार की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि शादी का वादा या समझ विशिष्ट होना चाहिए, न कि एक अस्पष्ट अपेक्षा।

यह फैसला एक ऐसे मामले से उपजा है जहां एक महिला ने अपने लिव-इन पार्टनर द्वारा शादी से इनकार करने पर बलात्कार का आरोप लगाया था। अदालत ने अपने फैसले में, शादी के वादे के उल्लंघन और बलात्कार के कृत्य के बीच अंतर किया। इसने उल्लेख किया कि इस तरह की परिस्थितियों में किसी कृत्य को बलात्कार माने जाने के लिए, शादी का वादा महिला द्वारा दी गई सहमति का एक प्रमुख कारक होना चाहिए।

हाईकोर्ट का यह निर्णय एक ऐसे रिश्ते के बीच कानूनी अंतर को स्पष्ट करने का प्रयास करता है जो बिना शादी के समाप्त हो जाता है, और एक आपराधिक अपराध। यह रेखांकित करता है कि यद्यपि ऐसी स्थितियाँ दीवानी विवादों या अन्य कानूनी उपायों को जन्म दे सकती हैं, वे आवश्यक रूप से बलात्कार के कड़े कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करती हैं।