📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Augustus Binu : flickr
कृषि
केटीआर ने पालामुरु किसानों के लिए फसल नुकसान सर्वेक्षण व मुआवजे की मांग की
✍️ Telangana Today
🗓 27 सित. 2026, 08:46 PM
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तेलंगाना के मंत्री के. टी. रामाराव ने पालामुरु क्षेत्र के किसानों को फसल नुकसान सर्वेक्षण और मुआवजा देने की राज्य सरकार से मांग की है।
उपमुख्यमंत्री के. टी. रामाराव ने सोमवार को तेलंगाना सरकार से महाबूबनगर जिले के पालामुरु क्षेत्र में फसल नुकसान का त्वरित सर्वेक्षण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नुकसान की सटीक गणना के बिना उचित मुआवजा प्रदान करना संभव नहीं है।
रामाराव ने बताया कि इस क्षेत्र के कई छोटे किसान फसल उत्पादन में गिरावट के कारण गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कृषि विभाग से डेटा संग्रह प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने और राहत उपायों को तुरंत लागू करने का अनुरोध किया।
किसानों की बढ़ती चिंताओं के बीच यह मांग सामने आई है, जहाँ मौजूदा सहायता योजनाओं को पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। राज्य ने अभी तक सर्वेक्षण या मुआवजा योजना के लिए कोई समय‑सारिणी नहीं दी है।
यदि सर्वेक्षण को मंजूरी मिलती है, तो इसमें फील्ड निरीक्षण और किसानों के साक्षात्कार शामिल होंगे, जिससे नुकसान की वास्तविक सीमा तय की जा सकेगी। मुआवजा, गणना के बाद, राज्य की मौजूदा कृषि सहायता चैनलों के माध्यम से वितरित किया जाएगा।
यह कदम तेलंगाना में कृषि संकट को कम करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, विशेषकर पालामुरु जैसे सूखा‑प्रवण क्षेत्रों में।
रामाराव ने बताया कि इस क्षेत्र के कई छोटे किसान फसल उत्पादन में गिरावट के कारण गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कृषि विभाग से डेटा संग्रह प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने और राहत उपायों को तुरंत लागू करने का अनुरोध किया।
किसानों की बढ़ती चिंताओं के बीच यह मांग सामने आई है, जहाँ मौजूदा सहायता योजनाओं को पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। राज्य ने अभी तक सर्वेक्षण या मुआवजा योजना के लिए कोई समय‑सारिणी नहीं दी है।
यदि सर्वेक्षण को मंजूरी मिलती है, तो इसमें फील्ड निरीक्षण और किसानों के साक्षात्कार शामिल होंगे, जिससे नुकसान की वास्तविक सीमा तय की जा सकेगी। मुआवजा, गणना के बाद, राज्य की मौजूदा कृषि सहायता चैनलों के माध्यम से वितरित किया जाएगा।
यह कदम तेलंगाना में कृषि संकट को कम करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, विशेषकर पालामुरु जैसे सूखा‑प्रवण क्षेत्रों में।