Agriculture
खेत बचाओ अभियान में टिमरनी‑खिरकिया‑हरदा के गाँवों में कृषक चौपाल आयोजित
कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं ने विकासखंड टिमरनी, खिरकिया और हरदा के कई गाँवों में उर्वरक विकल्प, नरवाई प्रबंधन और ई‑विकास प्रणाली के बारे में किसानों को प्रशिक्षण दिया।
जिले में खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं ने विकासखंड टिमरनी, खिरकिया एवं हरदा के विभिन्न गाँवों में कृषक चौपालों का आयोजन किया। इन बैठकों में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, नरवाई प्रबंधन तथा ई‑विकास प्रणाली पोर्टल के माध्यम से ई‑टोकन बुकिंग की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।
विकासखंड टिमरनी के मनियाखेड़ी, सोहागपुर, निर्माचखुर्द, पड़वा और उन्द्राकच्छ सहित कई गाँवों में, तथा खिरकिया के छीपाबड़, गोमगांव, बंदीमुहड़िया, हसनपुरा, चौकी, कालधड़, जूनपानी, धनकार और महेंद्रगांव में किसानों से संवाद स्थापित किया गया। हरदा के बैडी सहित अन्य गाँवों में भी समान कार्यक्रम चलाया गया।
कृषक चौपाल में डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में एनपीके 12:32:16, 20:20:0:13, 16:20:0:13, टीएसपी एवं एसएसपी उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहन दिया गया और फसल व मृदा की स्थिति के अनुसार संतुलित उर्वरक प्रयोग करने की सलाह दी गई। नरवाई प्रबंधन के संदर्भ में फसल अवशेषों के उचित निपटान हेतु उन्नत कृषि यंत्रों के उपयोग की भी जानकारी प्रदान की गई।
अंत में, कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं ने ई‑विकास प्रणाली पोर्टल के माध्यम से ई‑टोकन बुक करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया, जिससे किसान उर्वरक प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरलता से समझ सकें। इस अभियान के माध्यम से किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, नरवाई के उचित प्रबंधन और कृषि‑संबंधी ऑनलाइन सुविधाओं के प्रति जागरूक करने का लक्ष्य साधा गया।
विकासखंड टिमरनी के मनियाखेड़ी, सोहागपुर, निर्माचखुर्द, पड़वा और उन्द्राकच्छ सहित कई गाँवों में, तथा खिरकिया के छीपाबड़, गोमगांव, बंदीमुहड़िया, हसनपुरा, चौकी, कालधड़, जूनपानी, धनकार और महेंद्रगांव में किसानों से संवाद स्थापित किया गया। हरदा के बैडी सहित अन्य गाँवों में भी समान कार्यक्रम चलाया गया।
कृषक चौपाल में डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में एनपीके 12:32:16, 20:20:0:13, 16:20:0:13, टीएसपी एवं एसएसपी उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहन दिया गया और फसल व मृदा की स्थिति के अनुसार संतुलित उर्वरक प्रयोग करने की सलाह दी गई। नरवाई प्रबंधन के संदर्भ में फसल अवशेषों के उचित निपटान हेतु उन्नत कृषि यंत्रों के उपयोग की भी जानकारी प्रदान की गई।
अंत में, कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं ने ई‑विकास प्रणाली पोर्टल के माध्यम से ई‑टोकन बुक करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया, जिससे किसान उर्वरक प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरलता से समझ सकें। इस अभियान के माध्यम से किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, नरवाई के उचित प्रबंधन और कृषि‑संबंधी ऑनलाइन सुविधाओं के प्रति जागरूक करने का लक्ष्य साधा गया।