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09 अक्टू. 2026•
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कृषि

खिलेडी क्षेत्र में कम बारिश से बदला खेती का ढर्रा गेहूं-लहसुन छोड़ चने की बोवनी पर मजबूर हुए किसान

✍️ रिपोर्टर: Rahul Bairagi 🗓 09 अक्टू. 2026, 10:14 AM 👁 23
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धार जिले में बारिश नहीं होने से सूखे के हालात किसान सूखा घोषित की कर रहे मांग

खिलेडी । खिलेडी क्षेत्र में 48 प्रतिशत से भी कम बारिश से बदला खेती का ढर्रा गेहूं-लहसुन छोड़ चने की बोवनी पर मजबूर हुए किसान
इस बार खिलेडी सहित आसपास क्षेत्रों में इस साल मानसून की बेरुखी ने किसानों की कमर तोड़ दी है नेताओं के दावों और सूखा घोषित करने की कागजी मांगों के बिच खिलेडी और उसके आस-पास के गांवों के खेतों की तो हकीकत बेहद डरावनी नजर आई धूल उड़ते खेत, सूखे खेतों में फसलों की बुवाई की तैयारीयां और खाली पड़े कुएं तालाब गवाही दे रहे हैं कि इस बार रबी सीजन में अन्नदाता के सामने पानी का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो चुका है पानी की भारी किल्लत को देखते हुए खिलेडी क्षेत्र के किसानों ने इस बार गेहूं, प्याज और लहसुन मटर जैसी अधिक पानी चाहने वाली फसलों से तौबा कर ली है और कम पानी में होने वाले चने की बुवाई की तरफ रुख कर रहे हैं।
खिलेडी फुलेडी के किसानों ने बताया कि इंद्रजीत पटेल, गोवर्धन सिंह डोडिया, मनोहर सिंह पटेल, दिलीप कुमार जागीरदार, संजय मुकाती,सत्यनारायण पाटीदार आदी किसानों ने बताया कि कुएं और बोरवेल पिछले साल के मुकाबले इस बार कुओं में पानी सिर्फ 30 प्रतिशत से भी कम बचा है।
गांव के सभी बड़े तालाब और क्षेत्र के स्थानीय तालाबों में केवल नाममात्र का पानी है व कई तालाब पुरी तरह खाली है, जिससे रबी फसलों की सिंचाई करना असंभव नजर आ रहा है यहां सिंचाई करना तो दूर पीने के पानी की समस्या अभी से नजर आ रही है किसानों ने बताया पानी की इस कमी का सीधा असर आगामी रबी सीजन की बोवनी पर पड़ रहा है किसानों ने बताया कि खिलेडी गांव क्षेत्र में पिछले साल 60से 65 प्रतिशत गेहूं की बुवाई हुई थी मगर इस बार पानी की कमी के चलते 10 प्रतिशत गेहूं बुवाई हो सकती है वही पिछले साल इधर लहसुन प्याज मटर की बुवाई 35से 40 प्रतिशत बुवाई हुई थी इस बार 10 से 20 प्रतिशत इन फसलों की तैयारीयां कर रहे किसान वो भी खेतों में सिधे पानी देने की बजाय हमारे पानी के फव्वारे व ड्रिप सिस्टम से पानी देने की तैयारी कर रहे हैं वही किसानों ने बताया कि इस बार बारिश कम होने से चूंकि गेहूं और लहसुन प्याज की फसलों को 4 से 6 बार पानी की जरूरत होती है, इसलिए वे इस बार इनकी बोवनी से कतरा रहे हैं। इसकी जगह किसान चने की बुवाई को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो कम नमी में भी तैयार हो जाती है। कृषि जानकारों के मुताबिक, सिंचाई सुविधा न होने से रबी का कुल रकबा 30 से 35% तक घट सकता है।
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