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04 Nov 2026•
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खाकी पर लगा दाग! तस्करी मामले में दो युवकों को छोड़ने के बदले वसूली का आरोप, घेरे में 8 पुलिसकर्मी

✍️ Reporter: Kumar Raushan 🗓 04 Nov 2026, 06:23 PM 👁 9
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राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र में मादक पदार्थों की खरीद बिक्री के मामले में पुलिस की कार्रवाई अब खुद पुलिसकर्मियों के लिए सवालों के घेरे में आ गई है. दरअसल गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी के दौरान गिरफ्तार एक आरोपी के साथ पकड़े गए दो अन्य युवकों को छोड़ने और उनसे कथित तौर पर मोटी रकम लेने का मामला सामने आया है.

राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र में मादक पदार्थों की खरीद बिक्री के मामले में पुलिस की कार्रवाई अब खुद पुलिसकर्मियों के लिए सवालों के घेरे में आ गई है. दरअसल गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी के दौरान गिरफ्तार एक आरोपी के साथ पकड़े गए दो अन्य युवकों को छोड़ने और उनसे कथित तौर पर मोटी रकम लेने का मामला सामने आया है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं. वहीं प्रारंभिक जानकारी के आधार पर संबंधित पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के साथ निलंबन और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. नगर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी पटना के कार्यालय से 4 नवंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार. 26 अक्टूबर 2026 को फुलवारी शरीफ थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मादक पदार्थों की खरीद बिक्री करने वाले आरोपियों के खिलाफ छापेमारी की थी. इस दौरान आकिब खान उर्फ मो. साकिब खान को मादक पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार आरोपी की उम्र 32 वर्ष बताई गई है. वह मो. सलाहुद्दीन खान का पुत्र है और नया टोला पठान टोली वार्ड संख्या 24 फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र का रहने वाला है. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इस मामले में फुलवारी शरीफ थाना कांड संख्या 1867/26 दिनांक 26 अक्टूबर 2026 को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8(सी) और 21(सी) के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)(ए) और 26 के तहत मामला दर्ज किया गया था. प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि छापेमारी के दौरान आकिब खान के साथ मो. आफताब आलम और मो. एहसान नाम के दो अन्य व्यक्तियों को भी पकड़कर थाना लाया गया था. हालांकि इन दोनों का नाम न तो प्राथमिकी में दर्ज किया गया और न ही इस संबंध में वरीय अधिकारियों को सूचना दी गई.

आरोप है कि इसके बाद छापेमारी दल में शामिल पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों ने दोनों युवकों से मोटी रकम लेकर उन्हें पुलिस अभिरक्षा से छोड़ दिया. बताया गया है कि पैसे के लेनदेन को लेकर बाद में आपस में कहासुनी और विवाद होने लगा. इसी घटनाक्रम की जानकारी वरीय अधिकारियों तक पहुंची. जिसके बाद पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई गई. मामले की जांच सहायक पुलिस अधीक्षक फुलवारी शरीफ पटना को सौंपी गई है. जांच के दायरे में छापेमारी दल में शामिल पुलिस पदाधिकारी और कर्मी हैं. इनमें दिवाकर प्रसाद. नारद मुनी सिंह. रितेश कुमार. आकाश कुमार. पवन कुमार. साबिर आलम. आनंद राज और शुभम कुमार के नाम शामिल हैं. इसके अलावा स्थानीय लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है.

वरीय पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई करने और संबंधित पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है. अब जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि इस कथित अनियमितता में किन लोगों की भूमिका रही है और उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
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