📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shagil Kannur
राजनीति
केरल वक्फ बोर्ड ने मुस्लिम लीग नेता को प्रमुख बनाया, कोर्ट में चुनौती
✍️ Munsif News 24x7
🗓 17 अक्टू. 2026, 02:46 PM
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केरल वक्फ बोर्ड ने अपनी कार्यकारी संरचना बदलते हुए एक वरिष्ठ मुस्लिम लीग नेता को प्रमुख नियुक्त किया, जिसे अदालत में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
केरल वक्फ बोर्ड ने अपने शीर्ष प्रबंधन में बदलाव की घोषणा की, जिसमें भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग के एक वरिष्ठ नेता को नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति बोर्ड की इस सप्ताह की बैठक में की गई और राज्य भर में धार्मिक एवं चैरिटी कार्यों को दिशा देने के उद्देश्य से की गई है।
बोर्ड, जो केरल में हजारों मस्जिदों, दरगाहों और वक्फ संपत्तियों की देखरेख करता है, ने कहा कि इस निर्णय से सदस्यगण अनुभवी राजनीतिक नेतृत्व को संस्थान के प्रशासन में लाने के लिए सहमत हुए हैं। नए अध्यक्ष से अपेक्षा की जा रही है कि वे स्थानीय समुदायों और सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय करके वक्फ संपत्तियों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करें।
हालांकि, इस नियुक्ति को एक कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। केरल हाई कोर्ट में दायर याचिका चयन प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाती है, यह तर्क देते हुए कि बोर्ड के नियमों का सही पालन नहीं किया गया। अदालत ने अपना फैसला स्थगित रखा है और परिणाम आने तक बोर्ड के निर्णयों पर रोक लग सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद राज्य में धार्मिक संस्थानों और राजनीतिक प्रभाव के बीच नाज़ुक संतुलन को उजागर करता है। बोर्ड ने न्यायालय के साथ सहयोग करने और किसी भी अतिरिक्त निर्देश के आने तक अपने नियमित कार्य जारी रखने का आश्वासन दिया है।
बोर्ड, जो केरल में हजारों मस्जिदों, दरगाहों और वक्फ संपत्तियों की देखरेख करता है, ने कहा कि इस निर्णय से सदस्यगण अनुभवी राजनीतिक नेतृत्व को संस्थान के प्रशासन में लाने के लिए सहमत हुए हैं। नए अध्यक्ष से अपेक्षा की जा रही है कि वे स्थानीय समुदायों और सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय करके वक्फ संपत्तियों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करें।
हालांकि, इस नियुक्ति को एक कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। केरल हाई कोर्ट में दायर याचिका चयन प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाती है, यह तर्क देते हुए कि बोर्ड के नियमों का सही पालन नहीं किया गया। अदालत ने अपना फैसला स्थगित रखा है और परिणाम आने तक बोर्ड के निर्णयों पर रोक लग सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद राज्य में धार्मिक संस्थानों और राजनीतिक प्रभाव के बीच नाज़ुक संतुलन को उजागर करता है। बोर्ड ने न्यायालय के साथ सहयोग करने और किसी भी अतिरिक्त निर्देश के आने तक अपने नियमित कार्य जारी रखने का आश्वासन दिया है।