📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Panavalli
बिज़नेस
केरल के कक्षा 12 के छात्र ने पिता के लिए कमाए ₹2 लाख, युवा एआई उद्यमी
✍️ Business Today
🗓 02 सित. 2026, 10:38 AM
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केरल के एक कक्षा 12 के छात्र ने एआई स्टार्टअप चलाकर अपने पिता के लिए ₹2 लाख की मासिक आय अर्जित की, जिससे भारत में युवा‑प्रेरित तकनीकी उद्यमों की बढ़ती महत्ता स्पष्ट होती है।
केरल के एक १७ साल के कक्षा 12 के छात्र ने कृत्रिम‑बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित सेवा शुरू की, जिससे अब उनके पिता को लगभग ₹२ लाख की मासिक वेतन मिल रही है। यह युवा उद्यमी बोर्ड परीक्षा की तैयारी के दौरान खुले‑स्रोत एआई मॉडल का उपयोग करके छोटे व्यवसायों के लिए ऑटोमेशन समाधान प्रदान करता है।
वह बताते हैं कि यह प्रोजेक्ट स्कूल में शुरू हुआ और स्थानीय ग्राहकों की लागत‑प्रभावी डिजिटल टूल की मांग के कारण जल्दी ही राजस्व उत्पन्न करने लगा। कुछ ही महीनों में आय इतनी बढ़ी कि उन्होंने अपने पिता को पूर्णकालिक प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया, जिससे छात्र परिवार का मुख्य कमाने वाला बन गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उदाहरण भारत में युवाओं के लिए एआई तकनीक की पहुँच में तेज़ी को दर्शाता है। औपचारिक प्रशिक्षण सीमित होने के बावजूद, किफायती क्लाउड सेवाएँ और ऑनलाइन ट्यूटोरियल सक्षम छात्रों को बड़े पूँजी के बिना बाजार‑तैयार उत्पाद बनाने में सक्षम बनाते हैं।
उद्यमी ने कंपनी का नाम नहीं बताया, लेकिन कहा कि व्यवसाय उनके केरल के गृह नगर से संचालित होता है और दक्षिण भारत में ग्राहक आधार का विस्तार करने की योजना है।
विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी कहानियाँ नीति निर्माताओं को स्कूलों में उद्यमिता पाठ्यक्रम मजबूत करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं, जिससे अधिक छात्रों को तकनीकी कौशल को स्थायी आय में बदलने का अवसर मिले।
वह बताते हैं कि यह प्रोजेक्ट स्कूल में शुरू हुआ और स्थानीय ग्राहकों की लागत‑प्रभावी डिजिटल टूल की मांग के कारण जल्दी ही राजस्व उत्पन्न करने लगा। कुछ ही महीनों में आय इतनी बढ़ी कि उन्होंने अपने पिता को पूर्णकालिक प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया, जिससे छात्र परिवार का मुख्य कमाने वाला बन गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उदाहरण भारत में युवाओं के लिए एआई तकनीक की पहुँच में तेज़ी को दर्शाता है। औपचारिक प्रशिक्षण सीमित होने के बावजूद, किफायती क्लाउड सेवाएँ और ऑनलाइन ट्यूटोरियल सक्षम छात्रों को बड़े पूँजी के बिना बाजार‑तैयार उत्पाद बनाने में सक्षम बनाते हैं।
उद्यमी ने कंपनी का नाम नहीं बताया, लेकिन कहा कि व्यवसाय उनके केरल के गृह नगर से संचालित होता है और दक्षिण भारत में ग्राहक आधार का विस्तार करने की योजना है।
विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी कहानियाँ नीति निर्माताओं को स्कूलों में उद्यमिता पाठ्यक्रम मजबूत करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं, जिससे अधिक छात्रों को तकनीकी कौशल को स्थायी आय में बदलने का अवसर मिले।