📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gzzz
मनोरंजन
केनेडी सेंटर ने कहा, ट्रम्प का नाम 8 सितंबर से पहले पुनः स्थापित नहीं करेगा
✍️ hindustantimes.com
🗓 20 अग. 2026, 09:50 AM
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केनेडी सेंटर ने एक संघीय अदालत को सूचित किया है कि वह 8 सितंबर से पहले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नाम को स्थल पर पुनः स्थापित करने का प्रयास नहीं करेगा, नामकरण अधिकारों पर कानूनी विवाद के बाद।
केनेडी सेंटर, वाशिंगटन डी.सी. का एक प्रमुख प्रदर्शन‑कला स्थल, ने एक संघीय अदालत को सूचित किया है कि वह 8 सितंबर से पहले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नाम को भवन पर पुनः स्थापित करने के प्रयास नहीं करेगा। यह निर्णय ट्रम्प संगठन द्वारा दायर मुकदमे के बाद आया है, जिसमें वे 2019 में सेंटर के नाम बदलने को उलटने की मांग कर रहे हैं।
यह केंद्र मूल रूप से पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी के नाम पर था, जिसे 2019 में ट्रम्प फाउंडेशन के दान के बदले ट्रम्प के नाम पर रखा गया। बाद में इस नामकरण को चुनौती दी गई और 2021 में एक न्यायाधीश ने ट्रम्प नाम को हटाने का आदेश दिया। संगठन ने इस निर्णय के खिलाफ अपील जारी रखी है।
अपनी दायर की गई फाइलिंग में केनेडी सेंटर ने कहा कि वह 8 सितंबर तक किसी भी कार्रवाई से परहेज़ करेगा, जब अपील के अंतिम निर्णय की उम्मीद है। सेंटर ने यह भी ज़ोर दिया कि वह स्थल के मूल समर्पण को केनेडी के प्रति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह मामला पूर्व राष्ट्रपतियों की विरासत और सार्वजनिक स्थानों पर राजनीतिक स्मारकों के उपयोग पर व्यापक बहस को उजागर करता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से सांस्कृतिक संस्थानों के नामकरण अधिकारों से संबंधित समान विवादों के लिए मिसाल कायम हो सकती है।
यह केंद्र मूल रूप से पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी के नाम पर था, जिसे 2019 में ट्रम्प फाउंडेशन के दान के बदले ट्रम्प के नाम पर रखा गया। बाद में इस नामकरण को चुनौती दी गई और 2021 में एक न्यायाधीश ने ट्रम्प नाम को हटाने का आदेश दिया। संगठन ने इस निर्णय के खिलाफ अपील जारी रखी है।
अपनी दायर की गई फाइलिंग में केनेडी सेंटर ने कहा कि वह 8 सितंबर तक किसी भी कार्रवाई से परहेज़ करेगा, जब अपील के अंतिम निर्णय की उम्मीद है। सेंटर ने यह भी ज़ोर दिया कि वह स्थल के मूल समर्पण को केनेडी के प्रति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह मामला पूर्व राष्ट्रपतियों की विरासत और सार्वजनिक स्थानों पर राजनीतिक स्मारकों के उपयोग पर व्यापक बहस को उजागर करता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से सांस्कृतिक संस्थानों के नामकरण अधिकारों से संबंधित समान विवादों के लिए मिसाल कायम हो सकती है।