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कटिहार में ‘नो हॉर्न संडे’ का ऐलान: बेवजह हॉर्न बजाने पर लगेगी लगाम
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कटिहार शहर में अब रविवार को बेवजह हॉर्न बजाने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही अस्पतालों और स्कूलों के आसपास के इलाकों को पूरी तरह नो-हॉर्न जोन घोषित किया गया है।
कटिहार शहर में ध्वनि प्रदूषण को कम करने और लोगों को शांतिपूर्ण माहौल प्रदान करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला प्रशासन ने 'नो हॉर्न संडे' का ऐलान किया है, जिसके तहत अब हर रविवार को शहर में बेवजह हॉर्न बजाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। इस निर्णय का उद्देश्य सड़कों पर अनावश्यक शोरगुल को कम करना और नागरिकों को एक शांत सप्ताहांत प्रदान करना है।
इसके अतिरिक्त, शहर के संवेदनशील इलाकों में भी विशेष ध्यान दिया गया है। अस्पतालों और स्कूलों के आसपास के क्षेत्रों को 'नो-हॉर्न जोन' घोषित किया गया है। इस कदम से मरीजों को आराम मिलेगा और छात्रों की पढ़ाई में व्यवधान नहीं होगा। इन क्षेत्रों में हॉर्न बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जिससे शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।
वाहनों में अवैध रूप से लगाए गए कर्कश और तेज प्रेशर हॉर्न पाए जाने पर मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) के तहत चालान व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तेज आवाज वाले अवैध हॉर्न बेचने वाले प्रतिष्ठानों और स्कूल बसों की भी सघन जांच की जा रही है।
डीटीओ डेजी रानी की अपील और मुख्य बातें:
स्वास्थ्य पर गंभीर असर:
लगातार और बेवजह हॉर्न बजाने से सुनने की क्षमता कमजोर होने के साथ-साथ तनाव, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, अनिद्रा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
प्रशासन ने लोगों से इस नई पहल में सहयोग करने की अपील की है। 'नो हॉर्न संडे' और नो-हॉर्न जोन के नियमों का पालन करके नागरिक शहर को एक शांत और स्वस्थ स्थान बनाने में योगदान दे सकते हैं। यह पहल न केवल ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करेगी, बल्कि सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी।
इसके अतिरिक्त, शहर के संवेदनशील इलाकों में भी विशेष ध्यान दिया गया है। अस्पतालों और स्कूलों के आसपास के क्षेत्रों को 'नो-हॉर्न जोन' घोषित किया गया है। इस कदम से मरीजों को आराम मिलेगा और छात्रों की पढ़ाई में व्यवधान नहीं होगा। इन क्षेत्रों में हॉर्न बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जिससे शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।
वाहनों में अवैध रूप से लगाए गए कर्कश और तेज प्रेशर हॉर्न पाए जाने पर मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) के तहत चालान व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तेज आवाज वाले अवैध हॉर्न बेचने वाले प्रतिष्ठानों और स्कूल बसों की भी सघन जांच की जा रही है।
डीटीओ डेजी रानी की अपील और मुख्य बातें:
स्वास्थ्य पर गंभीर असर:
लगातार और बेवजह हॉर्न बजाने से सुनने की क्षमता कमजोर होने के साथ-साथ तनाव, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, अनिद्रा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
प्रशासन ने लोगों से इस नई पहल में सहयोग करने की अपील की है। 'नो हॉर्न संडे' और नो-हॉर्न जोन के नियमों का पालन करके नागरिक शहर को एक शांत और स्वस्थ स्थान बनाने में योगदान दे सकते हैं। यह पहल न केवल ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करेगी, बल्कि सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी।