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01 Nov 2026•
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Agriculture

किसान हित, प्रशासनिक कार्रवाई और सामाजिक एकजुटता के बीच बहेड़ी का गन्ना भुगतान मुद्दा, 17 नवंबर की नीलामी पर टिकी किसानों की उम्मीदें

✍️ Reporter: Jeetesh Singh 🗓 01 Nov 2026, 01:01 PM 👁 30
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बहेड़ी, बरेली के गन्ना किसानों का केसर शुगर मिल से जुड़ा करोड़ों रुपये का बकाया भुगतान अब क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक चिंता बन गया है। 24 अक्टूबर को स्थगित होने के बाद अब 17 नवंबर 2026 को होने वाली अगली नीलामी से किसानों को अपने हक की उम्मीद है।

बहेड़ी क्षेत्र के गन्ना किसानों का केसर शुगर मिल से जुड़ा लगभग 162 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान अब केवल किसानों की समस्या नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक चिंता बन चुका है। लंबे समय से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे किसानों की आवाज को स्थानीय व्यापारियों, अधिवक्ताओं और समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन मिल रहा है। इस बीच, 30 अक्टूबर को नई गन्ना सोसाइटी परिसर में हुए शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और उसके बाद व्यापारी अनमोल गर्ग तथा किसान टीकम सिंह उर्फ राजा भाटी को नोटिस जारी होने का मामला भी चर्चा में है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिकोण से यह कार्रवाई की है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से समस्याएं उठाना नागरिकों का अधिकार माना जाता है।

किसानों की परेशानी को देखते हुए बहेड़ी के व्यापारी अनमोल गर्ग ने किसानों से जाति, धर्म और राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील की थी, जबकि किसान टीकम सिंह उर्फ राजा भाटी भी भुगतान के मुद्दे पर किसानों की आवाज बुलंद करते रहे। 30 अक्टूबर के धरना-प्रदर्शन को बहेड़ी बार एसोसिएशन सहित अधिवक्ताओं और स्थानीय व्यापारियों का समर्थन मिलना इस बात का संकेत है कि गन्ना भुगतान का मुद्दा अब व्यापक जनहित का विषय बन चुका है। व्यापारियों और अधिवक्ताओं का मानना है कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तो बाजार, व्यापार और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी, क्योंकि किसान, व्यापारी और आम नागरिक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

इस प्रकरण में प्रशासन ने केसर शुगर मिल प्रबंधन की जवाबदेही तय करने और बकाया वसूली की कार्रवाई प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के कदम उठाए हैं। प्रशासन ने संबंधित फर्म को नोटिस जारी करने और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाने की बात कही थी। इसके अलावा, किसानों के बकाया भुगतान की वसूली के लिए मिल की कुर्क संपत्ति की नीलामी की कार्रवाई भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 31 अक्टूबर को जिलाधिकारी महोदय बरेली की बैठक और किसानों के भुगतान से जुड़े प्रशासनिक प्रयास इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

24 अक्टूबर को निर्धारित नीलामी प्रक्रिया पर्याप्त पात्र बोलीदाता और निर्धारित डिमांड ड्राफ्ट की शर्त पूरी नहीं होने के कारण स्थगित हो गई थी। अब किसानों की निगाहें 17 नवंबर 2026 को प्रस्तावित अगली नीलामी पर टिकी हैं। किसानों की अपेक्षा है कि इस बार नीलामी की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो और उससे प्राप्त धनराशि का उपयोग नियमानुसार उनके बकाया गन्ना मूल्य भुगतान में किया जाए। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए किसानों को न्याय दिलाने के प्रयास जारी रखे, जबकि मिल प्रबंधन को अपनी देनदारियों से बचने के बजाय भुगतान के लिए जवाबदेह बनना होगा।
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