📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Election commission of India
राजनीति
बीजेपी और जनता के विरोध के बाद कर्नाटक ने पार्क संशोधन बिल को वापस ले लिया
✍️ indianexpress.com
🗓 04 सित. 2026, 05:03 AM
👁 6
बीजेपी और नागरिक समूहों के विरोध के बाद कर्नाटक सरकार ने राज्य के पार्क नियमों में प्रस्तावित संशोधन को वापस ले लिया, पर्यावरणीय प्रभाव और सार्वजनिक पहुंच को लेकर चिंताओं को उजागर किया।
राज्य मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक हरित क्षेत्रों के उपयोग पर प्रतिबंध को ढीला करने वाले पार्क संशोधन बिल को वापस लेने की घोषणा की। यह कदम भाजपा और स्थानीय नागरिक समूहों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के बाद आया, जिन्होंने कहा कि यह बदलाव पर्यावरणीय संतुलन को खतरे में डालेंगे और समुदाय की पहुंच को सीमित करेंगे।
विरोधी नेताओं और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक विधान सभा के बाहर रैलियां आयोजित कीं, जिससे मौजूदा पार्क और विरासत स्थलों की सुरक्षा बनाए रखने की मांग की गई। जवाब में ruling party ने प्रस्ताव की पुनः समीक्षा करने और उठाए गए मुद्दों को संबोधित करने की आवश्यकता बताई।
बढ़ते दबाव के बाद, मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर बताया कि इस संशोधन को तत्काल रद्द कर दिया गया है और अब व्यापक हितधारक परामर्श किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय राज्य की प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित रखने और जनता की भावना को सम्मानित करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
इस वापसी से पार्क प्रबंधन नीतियों में किसी भी त्वरित बदलाव को रोका गया है, और सरकार ने भविष्य के प्रस्तावों की व्यापक सहमति के आधार पर जांच करने के लिए एक समिति बनाने का वादा किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से कर्नाटक में शहरी योजना और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े आगामी विधायी एजेंडा पर असर पड़ेगा।
विरोधी नेताओं और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक विधान सभा के बाहर रैलियां आयोजित कीं, जिससे मौजूदा पार्क और विरासत स्थलों की सुरक्षा बनाए रखने की मांग की गई। जवाब में ruling party ने प्रस्ताव की पुनः समीक्षा करने और उठाए गए मुद्दों को संबोधित करने की आवश्यकता बताई।
बढ़ते दबाव के बाद, मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर बताया कि इस संशोधन को तत्काल रद्द कर दिया गया है और अब व्यापक हितधारक परामर्श किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय राज्य की प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित रखने और जनता की भावना को सम्मानित करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
इस वापसी से पार्क प्रबंधन नीतियों में किसी भी त्वरित बदलाव को रोका गया है, और सरकार ने भविष्य के प्रस्तावों की व्यापक सहमति के आधार पर जांच करने के लिए एक समिति बनाने का वादा किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से कर्नाटक में शहरी योजना और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े आगामी विधायी एजेंडा पर असर पड़ेगा।