📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / President's Secretariat
स्थानीय
के.डी. शिवाकुमार ने कहा, कंबला और तुलुनाडु टेबलौ मैसूर दशहरा में दिखेंगे
✍️ The News Mill
🗓 16 अक्टू. 2026, 10:47 AM
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राज्य मंत्री डीके शिवाकुमार ने पुष्टि की कि पारंपरिक कंबला दौड़ और तुलुनाडु सांस्कृतिक टेबलौ आगामी मैसूर दशहरा में शामिल होंगे।
के.डी. शिवाकुमार, कर्नाटक के जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री, ने कहा कि इस साल मैसूर दशहरा में कंबला भैंस दौड़ और तुलुनाडु सांस्कृतिक टेबलौ का प्रदर्शन होगा। यह घोषणा बेंगलुरु में एक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान की गई, जहाँ उन्होंने राज्य की विविध परम्पराओं को राष्ट्रीय मंच पर लाने के महत्व पर बल दिया।
कंबला, जो दक्षिण कर्नाटक के डक्शिणा कंज़ा और उडुपी जिलों में आयोजित तेज़ गति वाली भैंस दौड़ है, को कर्नाटक की कृषि विरासत का प्रतीक माना जाता है। आयोजकों ने दशहरा टेबलौ के हिस्से के रूप में एक सिम्युलेटेड रेस आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे शहर के दर्शक वास्तविक आयोजन की कठिनाइयों के बिना इस उत्साह का अनुभव कर सकें।
तुलुनाडु टेबलौ में तुड़ु‑भाषी क्षेत्र के लोक नृत्य, संगीत और शिल्प प्रदर्शित किए जाएंगे, जिससे दक्षिणी तट की सांस्कृतिक समृद्धि को उजागर किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम मैसूर दशहरा को पूरे राज्य की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने के मंच के रूप में स्थापित करने की दिशा में है।
मैसूर दशहरा, जो दस दिन तक चलता है और लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है, traditionally मैसूर पैलेस के इर्द‑गिर्द घूमता है। इस वर्ष का विस्तारित कार्यक्रम राज्य की विभिन्न परम्पराओं को प्रमुख उत्सव में सम्मिलित करने की व्यापक नीति को दर्शाता है।
कंबला, जो दक्षिण कर्नाटक के डक्शिणा कंज़ा और उडुपी जिलों में आयोजित तेज़ गति वाली भैंस दौड़ है, को कर्नाटक की कृषि विरासत का प्रतीक माना जाता है। आयोजकों ने दशहरा टेबलौ के हिस्से के रूप में एक सिम्युलेटेड रेस आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे शहर के दर्शक वास्तविक आयोजन की कठिनाइयों के बिना इस उत्साह का अनुभव कर सकें।
तुलुनाडु टेबलौ में तुड़ु‑भाषी क्षेत्र के लोक नृत्य, संगीत और शिल्प प्रदर्शित किए जाएंगे, जिससे दक्षिणी तट की सांस्कृतिक समृद्धि को उजागर किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम मैसूर दशहरा को पूरे राज्य की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने के मंच के रूप में स्थापित करने की दिशा में है।
मैसूर दशहरा, जो दस दिन तक चलता है और लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है, traditionally मैसूर पैलेस के इर्द‑गिर्द घूमता है। इस वर्ष का विस्तारित कार्यक्रम राज्य की विभिन्न परम्पराओं को प्रमुख उत्सव में सम्मिलित करने की व्यापक नीति को दर्शाता है।