📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Raghu Naik NC
शिक्षा
कर्नाटक साक्षरता योजना में प्रगति, पर अंतर अभी भी बना
✍️ The Times of India
🗓 09 अक्टू. 2026, 02:47 AM
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एक अध्ययन में बताया गया कि कर्नाटक की साक्षरता योजना ने नामांकन और पढ़ने के स्तर में सुधार किया है, पर क्षेत्रीय और सामाजिक अंतर अभी भी मौजूद हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा उद्धृत एक अध्ययन के अनुसार, कर्नाटक की राज्य‑स्तरीय साक्षरता योजना ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जिसमें वयस्क शिक्षा कक्षाओं में नामांकन में वृद्धि और बुनियादी पढ़ने‑लिखने की क्षमता में हल्का सुधार देखा गया है। यह योजना शहरी झुग्गियों और दूरस्थ गांवों दोनों को लक्षित करती है।
सर्वेक्षण के आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य की समग्र साक्षरता दर लगभग दो प्रतिशत अंक बढ़ी है, और छह‑महीने के पाठ्यक्रम को पूरा करने वाले प्रतिभागियों की संख्या पिछले चक्र की तुलना में लगभग 15 % बढ़ी है। महिलाओं और युवा वयस्कों में सबसे अधिक सुधार देखा गया।
इन उपलब्धियों के बावजूद, अध्ययन में मौजूदा अंतर पर प्रकाश डाला गया है। ग्रामीण जिलों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में प्रगति धीमी है, और जनजातीय तथा कम‑आय वर्गों में पूर्णता दर कम बनी हुई है। लैंगिक अंतर, हालांकि घटा है, फिर भी पुरुषों का उच्च‑स्तर के पढ़ने‑लिखने के परीक्षणों में आगे रहना दिखाता है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने, डिजिटल लर्निंग टूल्स के उपयोग को बढ़ावा देने और लक्ष्य 2025 तक सार्वभौमिक साक्षरता प्राप्त करने के लिए निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
सर्वेक्षण के आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य की समग्र साक्षरता दर लगभग दो प्रतिशत अंक बढ़ी है, और छह‑महीने के पाठ्यक्रम को पूरा करने वाले प्रतिभागियों की संख्या पिछले चक्र की तुलना में लगभग 15 % बढ़ी है। महिलाओं और युवा वयस्कों में सबसे अधिक सुधार देखा गया।
इन उपलब्धियों के बावजूद, अध्ययन में मौजूदा अंतर पर प्रकाश डाला गया है। ग्रामीण जिलों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में प्रगति धीमी है, और जनजातीय तथा कम‑आय वर्गों में पूर्णता दर कम बनी हुई है। लैंगिक अंतर, हालांकि घटा है, फिर भी पुरुषों का उच्च‑स्तर के पढ़ने‑लिखने के परीक्षणों में आगे रहना दिखाता है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने, डिजिटल लर्निंग टूल्स के उपयोग को बढ़ावा देने और लक्ष्य 2025 तक सार्वभौमिक साक्षरता प्राप्त करने के लिए निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।