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15 सित. 2026
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कर्नाटक विधायी परिषद के चेयरमैन ने विधायकों से बासवन्ना के सिद्धांत अपनाने का आग्रह किया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Election commission of India
राजनीति

कर्नाटक विधायी परिषद के चेयरमैन ने विधायकों से बासवन्ना के सिद्धांत अपनाने का आग्रह किया

✍️ The New Indian Express 🗓 15 सित. 2026, 03:36 AM 👁 10
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कर्नाटक विधायी परिषद के चेयरमैन ने राज्य के कानून निर्माण में 12वीं सदी के सामाजिक सुधारक बासवन्ना की नैतिक शिक्षाओं को मार्गदर्शक बनाने का आह्वान किया।

कर्नाटक विधायी परिषद के चेयरमैन ने अपने सहयोगियों से बासवन्ना, मध्ययुगीन दार्शनिक और लिंगायत आंदोलन के संस्थापक, द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों को कानून निर्माण में आधार बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बासवन्ना की सामाजिक समानता, न्याय और नैतिक अखंडता की वकालत आज के शासन के लिए एक स्थायी ढांचा प्रदान करती है।

परिषद के सत्र के दौरान उन्होंने बताया कि बासवन्ना की शिक्षाएँ—जाति भेदभाव का त्याग और सामुदायिक सद्भावना को बढ़ावा—वर्तमान सामाजिक‑आर्थिक चुनौतियों से निपटने में विशेष रूप से प्रासंगिक हैं। उन्होंने सदस्यों से इन मूल्यों को ठोस नीतियों में परिवर्तित करने की अपील की, जिससे सभी वर्गों को लाभ पहुंचे।

ऐसे ऐतिहासिक सांस्कृतिक व्यक्तित्वों को नैतिक मानदंडों के रूप में उद्धृत करने का प्रवृत्ति बढ़ रहा है। जबकि किसी विशिष्ट विधेयक का उल्लेख नहीं किया गया, चेयरमैन के बयान से यह संकेत मिलता है कि भविष्य की विधायी पहलों को बासवन्ना के समानतावादी सिद्धांतों के अनुरूप बनाने का इरादा है।
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