📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Muhammad Mahdi Karim/ Augustus Binu
अपराध
कर्नाटक हाई कोर्ट ने केपीएससी घोटाले की एसआईटी गठन में देरी पर राज्य को फटकारा
✍️ India Today
🗓 29 अक्टू. 2026, 04:27 AM
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने केपीएससी भर्ती घोटाले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाने में देरी करने वाले राज्य सरकार को फटकारा और शीघ्र कार्रवाई का आदेश दिया।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक सार्वजनिक सेवा आयोग (केपीएससी) की भर्ती प्रक्रिया में संभावित घोटाले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाने में राज्य सरकार की देरी पर कड़ी निंदा की। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की देरी से नागरिकों का सार्वजनिक सेवाओं में विश्वास कमज़ोर होता है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि केपीएससी घोटाला, जिसमें चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप हैं, एक त्वरित और स्वतंत्र जांच का हकदार है। कोर्ट ने राज्य को एसआईटी का गठन तुरंत करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक लापरवाही पर न्यायालय की यह फटकार भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ती न्यायिक निगरानी को दर्शाती है। राज्य सरकार ने अभी तक एसआईटी के गठन के लिए स्पष्ट समय‑सारिणी नहीं बताई है, पर हाई कोर्ट का आदेश प्रक्रिया को तेज़ करने की संभावना रखता है।
यह कदम कर्नाटक प्रशासन पर दबाव बनाता है, क्योंकि विपक्षी दलों और नागरिक समाज ने इस घोटाले को सुलझाने में सरकार की सुस्ती की आलोचना की थी। कोर्ट का निर्देश पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।
केपीएससी परीक्षा में भाग लेने वाले अभ्यर्थी एसआईटी के गठन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, आशा है कि इससे किसी भी अनियमितता का पता चलेगा और राज्य की मेरिट‑आधारित चयन प्रणाली में भरोसा पुनः स्थापित होगा।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि केपीएससी घोटाला, जिसमें चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप हैं, एक त्वरित और स्वतंत्र जांच का हकदार है। कोर्ट ने राज्य को एसआईटी का गठन तुरंत करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक लापरवाही पर न्यायालय की यह फटकार भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ती न्यायिक निगरानी को दर्शाती है। राज्य सरकार ने अभी तक एसआईटी के गठन के लिए स्पष्ट समय‑सारिणी नहीं बताई है, पर हाई कोर्ट का आदेश प्रक्रिया को तेज़ करने की संभावना रखता है।
यह कदम कर्नाटक प्रशासन पर दबाव बनाता है, क्योंकि विपक्षी दलों और नागरिक समाज ने इस घोटाले को सुलझाने में सरकार की सुस्ती की आलोचना की थी। कोर्ट का निर्देश पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।
केपीएससी परीक्षा में भाग लेने वाले अभ्यर्थी एसआईटी के गठन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, आशा है कि इससे किसी भी अनियमितता का पता चलेगा और राज्य की मेरिट‑आधारित चयन प्रणाली में भरोसा पुनः स्थापित होगा।