📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Curvasingh
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने जनपैक्ट कार्यालय की जप्ती को 7,800 करोड़ के मामले में बरकरार रखा
✍️ Moneycontrol.com
🗓 19 सित. 2026, 12:36 PM
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने 7,800 करोड़ के धन शोधन मामले में जनपैक्ट के बेंगलुरु कार्यालय की जप्ती को मान्य किया।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने शुक्रवार को जनपैक्ट के बेंगलुरु कार्यालय की जप्ती को बरकरार रखा, क्योंकि यह संपत्ति 7,800 करोड़ रुपये के वित्तीय अनियमितता मामले में शामिल है। कोर्ट ने कहा कि यह जप्ती मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत की गई थी और एजेंसी ने अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग किया है।
वैश्विक बिजनेस‑प्रोसेस सर्विसेज कंपनी जनपैक्ट ने इस जप्ती को चुनौती दी थी, यह तर्क देते हुए कि यह संपत्ति उसके संचालन के लिए आवश्यक है। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि मनी‑लॉन्ड्रिंग के संभावित संकेतों के आधार पर जप्ती उचित है।
संबंधित आदेश में कोर्ट ने मामले के $100 मिलियन हिस्से के संबंध में सीमित राहत दी, जिससे एजेंसी को जांच के दौरान कुछ संपत्तियों को बरकरार रखने की अनुमति मिली। यह निर्णय बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट मामलों में एंटी‑मनी‑लॉन्ड्रिंग प्रवर्तन को समर्थन देता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भविष्य में भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ संपत्ति जप्ती कार्रवाई के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है, विशेषकर जब बड़ी रकम की जांच हो रही हो।
जाँच जारी है और जप्त की गई संपत्तियों के अंतिम निपटारे के लिए आगे की सुनवाई निर्धारित की गई है।
वैश्विक बिजनेस‑प्रोसेस सर्विसेज कंपनी जनपैक्ट ने इस जप्ती को चुनौती दी थी, यह तर्क देते हुए कि यह संपत्ति उसके संचालन के लिए आवश्यक है। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि मनी‑लॉन्ड्रिंग के संभावित संकेतों के आधार पर जप्ती उचित है।
संबंधित आदेश में कोर्ट ने मामले के $100 मिलियन हिस्से के संबंध में सीमित राहत दी, जिससे एजेंसी को जांच के दौरान कुछ संपत्तियों को बरकरार रखने की अनुमति मिली। यह निर्णय बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट मामलों में एंटी‑मनी‑लॉन्ड्रिंग प्रवर्तन को समर्थन देता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भविष्य में भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ संपत्ति जप्ती कार्रवाई के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है, विशेषकर जब बड़ी रकम की जांच हो रही हो।
जाँच जारी है और जप्त की गई संपत्तियों के अंतिम निपटारे के लिए आगे की सुनवाई निर्धारित की गई है।