📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of External Affairs
राजनीति
कर्नाटक उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय टीम से निष्पक्ष सूखा मूल्यांकन की मांग की
✍️ The News Mill
🗓 03 अक्टू. 2026, 08:48 PM
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कर्नाटक उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय सरकार से राज्य के सूखे का निष्पक्ष मूल्यांकन कराने का आग्रह किया, पारदर्शी आंकड़ों और समय पर सहायता की ज़रूरत पर बल दिया।
कर्नाटक वर्तमान में गंभीर जल संकट से जूझ रहा है, जिसने राज्य भर में लाखों किसानों और निवासियों को प्रभावित किया है। उपमुख्यमंत्री ने एक प्रेस ब्रीफिंग में केंद्रीय टीम से सूखे के प्रभाव का व्यापक और निष्पक्ष मूल्यांकन करने का आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि मौजूदा डेटा संग्रहण विधियाँ असंगत हैं और केंद्रीय अधिकारियों से स्पष्ट, डेटा‑आधारित रिपोर्ट तैयार करने का अनुरोध किया, जो राहत उपायों का मार्गदर्शन करेगी। उपमुख्यमंत्री ने सबसे अधिक प्रभावित जिलों को तुरंत संसाधन आवंटित करने की भी माँग की।
यह आग्रह बढ़ती चिंताओं के बीच आया है कि विलंबित मूल्यांकन समय पर जल और वित्तीय सहायता के वितरण में बाधा डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी मूल्यांकन प्रभावी नीति नियोजन के लिए अनिवार्य है।
केंद्रीय सरकार ने अभी तक प्रतिक्रिया नहीं दी है, परंतु उपमुख्यमंत्री का आह्वान वर्तमान सूखा निगरानी प्रोटोकॉल की समीक्षा और प्रभावित समुदायों के लिए समर्थन को तेज करने का संकेत देता है।
उन्होंने बताया कि मौजूदा डेटा संग्रहण विधियाँ असंगत हैं और केंद्रीय अधिकारियों से स्पष्ट, डेटा‑आधारित रिपोर्ट तैयार करने का अनुरोध किया, जो राहत उपायों का मार्गदर्शन करेगी। उपमुख्यमंत्री ने सबसे अधिक प्रभावित जिलों को तुरंत संसाधन आवंटित करने की भी माँग की।
यह आग्रह बढ़ती चिंताओं के बीच आया है कि विलंबित मूल्यांकन समय पर जल और वित्तीय सहायता के वितरण में बाधा डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी मूल्यांकन प्रभावी नीति नियोजन के लिए अनिवार्य है।
केंद्रीय सरकार ने अभी तक प्रतिक्रिया नहीं दी है, परंतु उपमुख्यमंत्री का आह्वान वर्तमान सूखा निगरानी प्रोटोकॉल की समीक्षा और प्रभावित समुदायों के लिए समर्थन को तेज करने का संकेत देता है।