📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
कर्नाटक सीएम ने भर्ती घोटाले के बाद सार्वजनिक सेवा आयोग को बंद करने पर विचार
✍️ The Economic Times
🗓 23 सित. 2026, 07:16 AM
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने भर्ती घोटाले के खुलासे के बाद कर्नाटक सार्वजनिक सेवा आयोग को बंद करने की संभावना पर विचार व्यक्त किए।
बेंगलुरु, कर्नाटक – कर्नाटक सार्वजनिक सेवा आयोग (केपीएससी) में बड़े पैमाने पर भर्ती घोटाले के खुलासे के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने इस निकाय को बंद करने की संभावना पर विचार किया है। इस घोटाले में विभिन्न सरकारी पदों के चयन में अनियमितताओं का आरोप लगा है, जिससे विपक्षी दल और नागरिक समाज ने तीखा विरोध किया है।
मुख्य मंत्री ने एक प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा कि सरकार सभी विकल्पों की समीक्षा कर रही है, जिसमें केपीएससी को समाप्त करना भी शामिल है, ताकि भर्ती प्रक्रिया में जनता का भरोसा पुनः स्थापित हो सके। उन्होंने बताया कि कोई भी निर्णय पूरी जांच और कानूनी‑प्रशासनिक विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।
यदि आयोग को बंद किया जाता है, तो राज्य को परीक्षाओं और नियुक्तियों को संचालित करने के लिए एक अंतरिम व्यवस्था स्थापित करनी पड़ेगी, जब तक नया ढांचा तैयार न हो जाए। इस कदम से कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और विधायी अनुमोदन की आवश्यकता हो सकती है, जिससे मुद्दा और जटिल हो जाता है।
विपक्षी नेताओं ने पूरी जांच और शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराने की मांग की है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अचानक बंद होने से चल रही भर्ती प्रक्रियाओं में बाधा आएगी और परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हजारों अभ्यर्थियों पर असर पड़ेगा।
केंद्रीय सरकार ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है, परन्तु यह घटना भारत में राज्य स्तर के भर्ती एजेंसियों की पारदर्शिता और योग्यता‑आधारित नियुक्तियों की आवश्यकता को और उजागर कर रही है।
मुख्य मंत्री ने एक प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा कि सरकार सभी विकल्पों की समीक्षा कर रही है, जिसमें केपीएससी को समाप्त करना भी शामिल है, ताकि भर्ती प्रक्रिया में जनता का भरोसा पुनः स्थापित हो सके। उन्होंने बताया कि कोई भी निर्णय पूरी जांच और कानूनी‑प्रशासनिक विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।
यदि आयोग को बंद किया जाता है, तो राज्य को परीक्षाओं और नियुक्तियों को संचालित करने के लिए एक अंतरिम व्यवस्था स्थापित करनी पड़ेगी, जब तक नया ढांचा तैयार न हो जाए। इस कदम से कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और विधायी अनुमोदन की आवश्यकता हो सकती है, जिससे मुद्दा और जटिल हो जाता है।
विपक्षी नेताओं ने पूरी जांच और शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराने की मांग की है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अचानक बंद होने से चल रही भर्ती प्रक्रियाओं में बाधा आएगी और परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हजारों अभ्यर्थियों पर असर पड़ेगा।
केंद्रीय सरकार ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है, परन्तु यह घटना भारत में राज्य स्तर के भर्ती एजेंसियों की पारदर्शिता और योग्यता‑आधारित नियुक्तियों की आवश्यकता को और उजागर कर रही है।