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कर्ज़ मुक्ति अभियान: सरकार ने कहा बैंक और सूदखोरों से न डरें, EMI न चुकाने को अपराध नहीं माना गया
सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने कर्ज़ लेने और EMI न चुकाने को अपराध नहीं माना, RBI के 13% ब्याज दर से अधिक को अवैध बताया।
सरकार ने स्पष्ट किया कि कर्ज़ लेने से कोई परेशानी नहीं होती और बैंक, रिकवरी एजेंट या सूदखोरों द्वारा जबरदस्ती परेशान या धमकी देने पर रिकॉर्डिंग करके शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी यही संदेश दिया कि EMI चुकाने से पहले परिवार के भरण‑पोषण को प्राथमिकता देना ज़रूरी है। आर्थिक स्थिति ख़राब होने पर EMI न चुकाना भी अपराध नहीं माना जाता।
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के गाइडलाइन के अनुसार 13% सालाना ब्याज दर से अधिक अवैध माना जाता है और जबरन वसूली को अपराध बताया गया। अपराधी वही है जो RBI के नियमों का उल्लंघन करता है।
नागरिकों को संगठित होकर अपनी आवाज़ सरकार तक पहुँचाने और कर्ज़ मुक्ति अभियान में भाग लेने का आग्रह किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने भी यही संदेश दिया कि EMI चुकाने से पहले परिवार के भरण‑पोषण को प्राथमिकता देना ज़रूरी है। आर्थिक स्थिति ख़राब होने पर EMI न चुकाना भी अपराध नहीं माना जाता।
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के गाइडलाइन के अनुसार 13% सालाना ब्याज दर से अधिक अवैध माना जाता है और जबरन वसूली को अपराध बताया गया। अपराधी वही है जो RBI के नियमों का उल्लंघन करता है।
नागरिकों को संगठित होकर अपनी आवाज़ सरकार तक पहुँचाने और कर्ज़ मुक्ति अभियान में भाग लेने का आग्रह किया गया।