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17 अक्टू. 2026•
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कर्ज वसूली के उत्पीड़न के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर 'कर्ज मुक्ति भारत' का अभियान
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कर्ज वसूली के उत्पीड़न के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर 'कर्ज मुक्ति भारत' का अभियान

✍️ रिपोर्टर: Kanhaiya Kumar Jha 🗓 17 अक्टू. 2026, 07:06 PM 👁 16
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कर्ज मुक्ति भारत अभियान ने लोगों को कर्ज वसूली के दौरान उत्पीड़न और धमकी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित किया है, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए।

कर्ज मुक्ति भारत अभियान ने आम जनता से अपील की है कि वे कर्ज वसूली के नाम पर किसी भी बैंक, रिकवरी एजेंट या सूदखोर द्वारा किए जा रहे जबरन उत्पीड़न, प्रताड़ना या धमकी से न डरें। अभियान के अनुसार, ऐसी किसी भी स्थिति में लोग डरने के बजाय सबूत के तौर पर रिकॉर्डिंग या वीडियो रिकॉर्डिंग करें और शिकायत दर्ज कराएं। यह स्पष्ट किया गया है कि कर्ज लेना कोई अपराध नहीं है, और खराब आर्थिक स्थिति के कारण ईएमआई या लोन न चुका पाना भी अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।

अभियान ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का भी उल्लेख किया है, जिसमें कहा गया है कि परिवार का भरण-पोषण करना ईएमआई या लोन चुकाने से ज्यादा जरूरी है। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे खुद को अपराधी या दोषी न मानें। असली अपराधी वे हैं जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं और 13% सालाना दर से अधिक ब्याज अवैध तरीके से वसूलते हैं। ऐसी जबरन वसूली को जुर्म और अपराध बताया गया है।

कर्ज मुक्ति भारत अभियान ने लोगों को संगठित होकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का आह्वान किया है। यह अभियान लोगों को कर्ज के बोझ से मुक्ति दिलाने और न्याय दिलाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। अभियान की वेबसाइट www.karzmuktbharat.co.in पर जाकर लोग इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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