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17 Oct 2026•
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कंप्यूटर इंजीनियर ने छोड़ी नौकरी, 5 करोड़ की लागत से फतेहपुर में बनाया करोड़ों का गौ फार्म
Agriculture

कंप्यूटर इंजीनियर ने छोड़ी नौकरी, 5 करोड़ की लागत से फतेहपुर में बनाया करोड़ों का गौ फार्म

✍️ Reporter: Niraj Kumar 🗓 16 Aug 2026, 04:30 PM 👁 85
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पटना के पास फतेहपुर में 31 वर्षीय कंप्यूटर साइंस इंजीनियर अमित कुमार ने नौकरी छोड़कर पशुपालन को अपनाया है। 2.5 एकड़ में फैले इस गौ फार्म में 250 से अधिक गिर नस्ल की गायें हैं और अब तक 5 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा चुका है।

पटना से महज 5 किलोमीटर दूर फतेहपुर में 31 वर्षीय कंप्यूटर साइंस इंजीनियर अमित कुमार ने एक मिसाल कायम की है। नौकरी छोड़कर पशुपालन के क्षेत्र में उतरे अमित ने गुजरात की देसी गिर नस्ल की गायों को समझा और महज 16 गायों से अपने फार्म की शुरुआत की। आज करीब ढाई एकड़ में फैले उनके फार्म में 250 से अधिक गाय, बछड़े और बछियां हैं। इस फार्म में अब तक 5 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा चुका है, जो युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।

अमित कुमार के परिवार का देशसेवा से गहरा जुड़ाव रहा है। इसी प्रेरणा से प्रेरित होकर उन्होंने कंप्यूटर साइंस की नौकरी छोड़कर पशुपालन को अपना मिशन बनाया। वर्तमान में फार्म की जिम्मेदारी उनके बड़े भाई देवव्रत सिंह संभाल रहे हैं। उनके अनुसार, 250 से अधिक पशुओं की देखरेख के लिए 20 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं। फार्म से प्रतिदिन करीब 300 किलो दूध पटना शहर में सप्लाई किया जाता है, जिसमें गिर गाय का दूध 149 रुपये प्रति किलो और देसी घी करीब 4000 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है।

फार्म में गायों का पालन-पोषण पारंपरिक तरीके से किया जाता है और कृत्रिम तरीकों से बचने का प्रयास किया जाता है। हाल ही में, 7 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित तीसरे सतत कृषि शिखर सम्मेलन पुरस्कार-2026 में देशी गोपालन के क्षेत्र में 200 गिर नस्ल की गायों की श्रेणी में फार्म को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, बेगूसराय में आयोजित एक प्रतियोगिता में भी इसी फार्म को प्रथम और द्वितीय दोनों पुरस्कार प्राप्त हुए।

देवव्रत सिंह ने बताया कि गिर गाय मूल रूप से गुजरात की नस्ल है और गर्मी सहन करने में सक्षम है, हालांकि ठंड के मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। बिहार में इसकी उपलब्धता कम होने के कारण लोग इसे आसानी से नहीं पाल पाते। फार्म का मुख्य उद्देश्य देसी नस्ल के संरक्षण के साथ-साथ शुद्ध और पौष्टिक दूध उपलब्ध कराना है।
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