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राजनीति
जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई सूर्य कांत से एसपी शर्मा को हटाने की मांग की
✍️ LawChakra
🗓 26 अग. 2026, 01:43 PM
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जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई सूर्य कांत को पत्र लिखकर राजस्थान हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस एस.पी. शर्मा को हटाने की अपील की है।
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने सीजेआई सूर्य कांत को पत्र लिखकर राजस्थान हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस एस.पी. शर्मा को हटाने का अनुरोध किया है। इस पत्र में मेहता जी ने न्यायिक प्रशासन में मौजूद समस्याओं को उजागर किया और समान परिस्थितियों में पहले किए गए हस्तक्षेपों का उल्लेख किया।
यह मांग राजस्थान हाई कोर्ट के कामकाज पर बढ़ते सवालों के बीच आई है, जबकि सीजेआई की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सीजेआई को उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस को पुनः नियुक्त या हटाने का संवैधानिक अधिकार है, पर यह कदम आमतौर पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही उठाया जाता है।
यदि सीजेआई इस सिफारिश पर कार्यवाही करते हैं, तो एक आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से बदलाव की घोषणा की जाएगी और स्थायी चीफ जस्टिस के चयन तक एक नया एक्टिंग चीफ जस्टिस नियुक्त किया जाएगा। यह घटना भारत की उच्च न्यायपालिका में जवाबदेही और प्रशासनिक त्रुटियों को सुधारने के तंत्र पर चल रहे बहस को उजागर करती है।
वर्तमान में इस अनुरोध के पीछे के विशिष्ट कारण या कोई साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया है, और यह मामला केवल लिखित अपील और आंतरिक न्यायिक प्रक्रियाओं तक सीमित है।
यह मांग राजस्थान हाई कोर्ट के कामकाज पर बढ़ते सवालों के बीच आई है, जबकि सीजेआई की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सीजेआई को उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस को पुनः नियुक्त या हटाने का संवैधानिक अधिकार है, पर यह कदम आमतौर पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही उठाया जाता है।
यदि सीजेआई इस सिफारिश पर कार्यवाही करते हैं, तो एक आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से बदलाव की घोषणा की जाएगी और स्थायी चीफ जस्टिस के चयन तक एक नया एक्टिंग चीफ जस्टिस नियुक्त किया जाएगा। यह घटना भारत की उच्च न्यायपालिका में जवाबदेही और प्रशासनिक त्रुटियों को सुधारने के तंत्र पर चल रहे बहस को उजागर करती है।
वर्तमान में इस अनुरोध के पीछे के विशिष्ट कारण या कोई साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया है, और यह मामला केवल लिखित अपील और आंतरिक न्यायिक प्रक्रियाओं तक सीमित है।