📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Babin Mew
बिज़नेस
जुपिटर वॉगन्स ने पश्चिम बंगाल में 100 मेगावाट/400 मेगावाट-घंटे बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट जिंका
✍️ Machine Maker
🗓 11 अग. 2026, 04:39 PM
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जुपिटर वॉगन्स को पश्चिम बंगाल में 100 मेगावाट/400 मेगावाट-घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजना का अनुबंध मिला, जिससे राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई।
जुपिटर वॉगन्स, बैटरी स्टोरेज समाधानों के प्रमुख निर्माता, ने पश्चिम बंगाल में 100 मेगावाट/400 मेगावाट‑घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजना के अनुबंध जीतने की घोषणा की। यह परियोजना, जिसे पश्चिम बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा दिया गया है, राज्य की ग्रिड स्थिरता का समर्थन करेगी और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण को बढ़ावा देगी।
इस अनुबंध में उन्नत लिथियम‑आयन बैटरी मॉड्यूल और संबंधित नियंत्रण प्रणालियों की स्थापना शामिल है। जुपिटर वॉगन्स अगले महीने साइट सर्वेक्षण शुरू करने और घटकों की खरीदारी आरम्भ करने की योजना बना रहा है, जिसका लक्ष्य 2025 के अंत तक परियोजना को चालू करना है।
यह जीत जुपिटर वॉगन्स की भारत के बैटरी स्टोरेज बाजार में बढ़ती उपस्थिति को दर्शाती है और सरकार के स्वच्छ ऊर्जा प्रयासों के साथ मेल खाती है। कंपनी उम्मीद करती है कि यह परियोजना स्थानीय रोजगार सृजन करेगी और क्षेत्रीय भागीदारों के साथ सहयोग को बढ़ावा देगी।
उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि BESS पश्चिम बंगाल को उसके नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगी और जीवाश्म ईंधन आधारित पीकिंग प्लांट्स पर निर्भरता को कम करेगी, जिससे समग्र ग्रिड लचीलापन बढ़ेगा।
इस अनुबंध में उन्नत लिथियम‑आयन बैटरी मॉड्यूल और संबंधित नियंत्रण प्रणालियों की स्थापना शामिल है। जुपिटर वॉगन्स अगले महीने साइट सर्वेक्षण शुरू करने और घटकों की खरीदारी आरम्भ करने की योजना बना रहा है, जिसका लक्ष्य 2025 के अंत तक परियोजना को चालू करना है।
यह जीत जुपिटर वॉगन्स की भारत के बैटरी स्टोरेज बाजार में बढ़ती उपस्थिति को दर्शाती है और सरकार के स्वच्छ ऊर्जा प्रयासों के साथ मेल खाती है। कंपनी उम्मीद करती है कि यह परियोजना स्थानीय रोजगार सृजन करेगी और क्षेत्रीय भागीदारों के साथ सहयोग को बढ़ावा देगी।
उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि BESS पश्चिम बंगाल को उसके नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगी और जीवाश्म ईंधन आधारित पीकिंग प्लांट्स पर निर्भरता को कम करेगी, जिससे समग्र ग्रिड लचीलापन बढ़ेगा।