📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
स्वास्थ्य
इंदौर के एमटीएच अस्पताल में सीनियर डॉक्टरों के उत्पीड़न से पीड़ित जूनियर रेजिडेंट ने इंसुलिन ओवरडोज से आत्महत्या की कोशिश
✍️ Amar Ujala · Indore
🗓 21 सित. 2026, 09:00 PM
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इंदौर के एमटीएच अस्पताल की प्रथम वर्ष की पीजी रेजिडेंट डॉ. सिमी यादव ने सीनियर डॉक्टरों के मानसिक उत्पीड़न और अधिक ड्यूटी के दबाव के कारण इंसुलिन ओवरडोज से आत्महत्या का प्रयास किया।
इंदौर, मध्य प्रदेश — एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एमटीएच अस्पताल में प्रथम वर्ष की पीजी जूनियर रेजिडेंट डॉ. सिमी यादव ने मानसिक उत्पीड़न और अत्यधिक ड्यूटी के दबाव के कारण इंसुलिन का ओवरडोज लेकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा लगातार उत्पीड़न और अनावश्यक कार्यभार ने उन्हें इस हद तक धकेल दिया कि उन्होंने यह कदम उठाया।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, वह शौचालय में प्रवेश करने के बाद ही ओवरडोज का पता चला, जिससे तुरंत मेडिकल स्टाफ ने आपातकालीन उपचार शुरू किया और उन्हें स्थिर किया गया।
यह घटना अस्पताल में कार्य परिस्थितियों और डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को उजागर करती है। अस्पताल ने कहा कि उत्पीड़न और कार्य‑दबाव की शिकायतों की जांच में वे सभी आधिकारिक जांचों के साथ सहयोग करेंगे।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिकित्सकों के लिए सहायक कार्य माहौल की आवश्यकता पर बल दिया है, विशेषकर जूनियर स्टाफ के लिए, जो अक्सर अत्यधिक दबाव का सामना करते हैं। यह मामला स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए नीतिगत सुधारों की मांग को और तेज कर रहा है।
जांच के आगे के परिणामों की प्रतीक्षा है, और चिकित्सा समुदाय इस पर नज़र रखेगा कि यह घटना डॉक्टरों के कल्याण संबंधी नीतियों को कैसे प्रभावित करती है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, वह शौचालय में प्रवेश करने के बाद ही ओवरडोज का पता चला, जिससे तुरंत मेडिकल स्टाफ ने आपातकालीन उपचार शुरू किया और उन्हें स्थिर किया गया।
यह घटना अस्पताल में कार्य परिस्थितियों और डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को उजागर करती है। अस्पताल ने कहा कि उत्पीड़न और कार्य‑दबाव की शिकायतों की जांच में वे सभी आधिकारिक जांचों के साथ सहयोग करेंगे।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिकित्सकों के लिए सहायक कार्य माहौल की आवश्यकता पर बल दिया है, विशेषकर जूनियर स्टाफ के लिए, जो अक्सर अत्यधिक दबाव का सामना करते हैं। यह मामला स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए नीतिगत सुधारों की मांग को और तेज कर रहा है।
जांच के आगे के परिणामों की प्रतीक्षा है, और चिकित्सा समुदाय इस पर नज़र रखेगा कि यह घटना डॉक्टरों के कल्याण संबंधी नीतियों को कैसे प्रभावित करती है।