📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / TrendSPLEND
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जोधपुर बार एसोसिएशन ने कार्य बहिष्कार की घोषणा, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश हटाने की मांग
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 31 अग. 2026, 03:32 PM
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जोधपुर की दोनों बार एसोसिएशन ने रविवार तक कार्य बहिष्कार का ऐलान किया, राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को हटाने की मांग की।
जोधपुर की दो बार एसोसिएशन ने रविवार को कार्य बहिष्कार की घोषणा की, जो राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को हटाने की मांग पर आधारित है। यह कदम उन वकीलों के एक वर्ग द्वारा उठाया गया है, जो इस नियुक्ति को अनुचित मानते हैं।
संयुक्त बयान में दोनों एसोसिएशन ने नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की कार्यकाल ने न्यायालय की कार्यक्षमता को प्रभावित किया है। उन्होंने सभी वकीलों से कोर्ट में पेशी न करने और अपने सभी कोर्ट‑संबंधी कार्यों को रोकने का आग्रह किया है, जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती।
अभी तक कोर्ट के अधिकारियों ने इस कार्य बहिष्कार या हटाने की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह टकराव राज्य की न्यायिक प्रणाली में चल रहे तनाव को और बढ़ा रहा है, जिससे न्यायालय की स्वतंत्रता और बार एसोसिएशन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वकीलों द्वारा इस प्रकार का सामूहिक विरोध भारत में दुर्लभ है, परन्तु यह संस्थागत विवादों का संकेत हो सकता है। इस विरोध का परिणाम भविष्य में बार एसोसिएशन और न्यायिक नियुक्तियों के बीच संबंधों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
संयुक्त बयान में दोनों एसोसिएशन ने नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की कार्यकाल ने न्यायालय की कार्यक्षमता को प्रभावित किया है। उन्होंने सभी वकीलों से कोर्ट में पेशी न करने और अपने सभी कोर्ट‑संबंधी कार्यों को रोकने का आग्रह किया है, जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती।
अभी तक कोर्ट के अधिकारियों ने इस कार्य बहिष्कार या हटाने की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह टकराव राज्य की न्यायिक प्रणाली में चल रहे तनाव को और बढ़ा रहा है, जिससे न्यायालय की स्वतंत्रता और बार एसोसिएशन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वकीलों द्वारा इस प्रकार का सामूहिक विरोध भारत में दुर्लभ है, परन्तु यह संस्थागत विवादों का संकेत हो सकता है। इस विरोध का परिणाम भविष्य में बार एसोसिएशन और न्यायिक नियुक्तियों के बीच संबंधों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।