📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
शिक्षा
जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस सीटें बढ़कर 1,750, 11 मेडिकल कॉलेजों में
✍️ Kashmir Life
🗓 24 सित. 2026, 12:48 PM
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जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस सीटों की संख्या 1,750 कर दी गई है, जो 11 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वितरित होंगी, कश्मीर लाइफ ने बताया।
जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य शिक्षा विभाग ने आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए एमबीबीएस सीटों को 1,750 तक बढ़ाने की घोषणा की है। यह वृद्धि राज्य के 11 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समान रूप से वितरित की जाएगी, जिससे डॉक्टरों की कमी को कम करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है।
कश्मीर लाइफ ने बताया कि मौजूदा बुनियादी ढाँचा और संकाय क्षमता की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया, जो नियामक मानकों को पूरा करता है। प्रत्येक कॉलेज को उसकी वर्तमान क्षमता और सुविधाओं के आधार पर नई सीटों का अनुपातिक हिस्सा मिलेगा।
राज्य के अधिकारियों का मानना है कि अधिक स्नातक स्थानीय सार्वजनिक अस्पतालों में कार्य करेंगे, जिससे दीर्घकालिक रूप से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुधरेगी। यह कदम भारत सरकार की मेडिकल शिक्षा को सुदृढ़ करने की व्यापक योजना के साथ भी मेल खाता है।
भविष्य के छात्रों को सामान्य NEET‑UG काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करना होगा, और संशोधित सीट मैट्रिक्स अगले काउंसलिंग राउंड में दिखाई देगा।
शिक्षा विशेषज्ञों ने इस वृद्धि का स्वागत किया, यह कहते हुए कि मेडिकल शिक्षा की क्षमता बढ़ाना जम्मू-कश्मीर की बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक है।
कश्मीर लाइफ ने बताया कि मौजूदा बुनियादी ढाँचा और संकाय क्षमता की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया, जो नियामक मानकों को पूरा करता है। प्रत्येक कॉलेज को उसकी वर्तमान क्षमता और सुविधाओं के आधार पर नई सीटों का अनुपातिक हिस्सा मिलेगा।
राज्य के अधिकारियों का मानना है कि अधिक स्नातक स्थानीय सार्वजनिक अस्पतालों में कार्य करेंगे, जिससे दीर्घकालिक रूप से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुधरेगी। यह कदम भारत सरकार की मेडिकल शिक्षा को सुदृढ़ करने की व्यापक योजना के साथ भी मेल खाता है।
भविष्य के छात्रों को सामान्य NEET‑UG काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करना होगा, और संशोधित सीट मैट्रिक्स अगले काउंसलिंग राउंड में दिखाई देगा।
शिक्षा विशेषज्ञों ने इस वृद्धि का स्वागत किया, यह कहते हुए कि मेडिकल शिक्षा की क्षमता बढ़ाना जम्मू-कश्मीर की बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक है।