📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Staunch.wiki
राजनीति
जम्मू-कश्मीर सरकार ने सोशल मीडिया नियमन के लिए मीडिया नीति तैयार की, साकीना इटू ने कहा
✍️ Kashmir Life
🗓 30 सित. 2026, 01:32 PM
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साकीना इटू ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा को बताया कि राज्य सरकार सोशल‑मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को नियंत्रित करने के लिए एक मीडिया नीति तैयार कर रही है।
जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ मंत्री साकीना इटू ने विधानसभा को बताया कि सरकार एक व्यापक मीडिया नीति तैयार कर रही है। इस मसौदे में सोशल‑मीडिया सेवाओं के संचालन के लिए दिशा‑निर्देश निर्धारित किए जाएंगे, जिसमें गलत सूचना, घृणा भाषण और सामग्री मॉडरेशन जैसे मुद्दों को संबोधित किया जाएगा।
इटू के अनुसार, इस नीति का निर्माण विभिन्न हितधारकों—तकनीकी विशेषज्ञों, नागरिक समाज समूहों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के प्रतिनिधियों—के साथ परामर्श के बाद किया जाएगा। समय‑सीमा अभी स्पष्ट नहीं हुई है, पर अधिकारी संकेत दे रहे हैं कि मसौदा इस वर्ष के अंत में विधानसभा में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
यह कदम डिजिटल संचार के नियामक ढांचे को आधुनिक बनाने के राज्य के व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बिठाते हुए क्षेत्रीय चुनौतियों को भी ध्यान में रखता है। अभी तक कोई विशिष्ट प्रावधान जारी नहीं किए गए हैं, और विपक्षी पक्षों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा के बारे में स्पष्टता माँगी है।
यदि नीति पारित होती है, तो यह जम्मू-कश्मीर में कार्यरत सोशल‑मीडिया कंपनियों पर नई अनुपालन आवश्यकताएँ थोप सकती है, जिससे सामग्री होस्टिंग और उपयोगकर्ता सत्यापन प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। सरकार ने कहा है कि लक्ष्य एक सुरक्षित ऑनलाइन माहौल बनाना है, बिना वैध संवाद को बाधित किए।
इटू के अनुसार, इस नीति का निर्माण विभिन्न हितधारकों—तकनीकी विशेषज्ञों, नागरिक समाज समूहों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के प्रतिनिधियों—के साथ परामर्श के बाद किया जाएगा। समय‑सीमा अभी स्पष्ट नहीं हुई है, पर अधिकारी संकेत दे रहे हैं कि मसौदा इस वर्ष के अंत में विधानसभा में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
यह कदम डिजिटल संचार के नियामक ढांचे को आधुनिक बनाने के राज्य के व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बिठाते हुए क्षेत्रीय चुनौतियों को भी ध्यान में रखता है। अभी तक कोई विशिष्ट प्रावधान जारी नहीं किए गए हैं, और विपक्षी पक्षों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा के बारे में स्पष्टता माँगी है।
यदि नीति पारित होती है, तो यह जम्मू-कश्मीर में कार्यरत सोशल‑मीडिया कंपनियों पर नई अनुपालन आवश्यकताएँ थोप सकती है, जिससे सामग्री होस्टिंग और उपयोगकर्ता सत्यापन प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। सरकार ने कहा है कि लक्ष्य एक सुरक्षित ऑनलाइन माहौल बनाना है, बिना वैध संवाद को बाधित किए।