📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
सरकारी योजना
जम्मू-कश्मीर ने 2026 के संपीड़ित बायोगैस नीति को लागू करने हेतु समितियाँ गठित की
✍️ Daily Excelsior
🗓 30 अक्टू. 2026, 09:17 PM
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जम्मू और कश्मीर सरकार ने 2026 के संपीड़ित बायोगैस नीति के कार्यान्वयन के लिए समितियाँ गठित की हैं, जिसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और मीथेन उत्सर्जन को कम करना है।
जम्मू और कश्मीर सरकार ने 2026 के संपीड़ित बायोगैस नीति के कार्यान्वयन के लिए विशेष समितियाँ गठित करने की घोषणा की है। यह नीति कृषि और नगरपालिका कचरे को स्वच्छ, नवीकरणीय ईंधन में बदलने पर केंद्रित है और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाने की सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
प्रत्येक समिति परियोजना समयरेखा तैयार करने, वित्त पोषण सुनिश्चित करने और स्थानीय प्राधिकरणों व निजी भागीदारों के साथ समन्वय करने के लिए जिम्मेदार होगी। अधिकारियों का कहना है कि ये निकाय पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की निगरानी करेंगे और ग्रामीण समुदायों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में मदद करेंगे।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह पहल 2026 तक 200 मेगावाट तक नवीकरणीय बिजली उत्पन्न कर सकती है, जिससे क्षेत्र की विद्युत ग्रिड को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा और कचरा प्रबंधन व बायोगैस संयंत्र संचालन में नौकरियाँ पैदा होंगी।
सरकार ने आने वाले हफ्तों में नीति ढाँचे को परिष्कृत करने और संसाधनों के आवंटन को अंतिम रूप देने के लिए हितधारक परामर्शों की एक श्रृंखला निर्धारित की है। समितियों से अपेक्षा है कि वे ऊर्जा और नवीकरणीय संसाधन विभाग को त्रैमासिक रिपोर्ट देंगी।
प्रत्येक समिति परियोजना समयरेखा तैयार करने, वित्त पोषण सुनिश्चित करने और स्थानीय प्राधिकरणों व निजी भागीदारों के साथ समन्वय करने के लिए जिम्मेदार होगी। अधिकारियों का कहना है कि ये निकाय पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की निगरानी करेंगे और ग्रामीण समुदायों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में मदद करेंगे।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह पहल 2026 तक 200 मेगावाट तक नवीकरणीय बिजली उत्पन्न कर सकती है, जिससे क्षेत्र की विद्युत ग्रिड को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा और कचरा प्रबंधन व बायोगैस संयंत्र संचालन में नौकरियाँ पैदा होंगी।
सरकार ने आने वाले हफ्तों में नीति ढाँचे को परिष्कृत करने और संसाधनों के आवंटन को अंतिम रूप देने के लिए हितधारक परामर्शों की एक श्रृंखला निर्धारित की है। समितियों से अपेक्षा है कि वे ऊर्जा और नवीकरणीय संसाधन विभाग को त्रैमासिक रिपोर्ट देंगी।