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अपराध
झारखंड हाई कोर्ट ने कहा, पीएमएलए में राशि का प्रेडिकेट अपराध से अंकगणितीय मेल जरूरी नहीं
✍️ Live Law
🗓 10 अक्टू. 2026, 02:17 PM
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झारखंड हाई कोर्ट ने कहा कि पीएमएलए के तहत धनराशि का प्रेडिकेट अपराध की राशि से अंकगणितीय मेल जरूरी नहीं है।
झारखंड हाई कोर्ट ने पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की व्याख्या पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि इस कानून में प्रेडिकेट अपराध की राशि और धारा के तहत लाँडर की गई धनराशि के बीच अंकगणितीय मेल अनिवार्य नहीं है।
न्यायालय ने यह तर्क दिया कि पीएमएलए का उद्देश्य अवैध वित्तीय प्रवाह को रोकना है, इसलिए वह उन रक़मों को भी शामिल कर सकता है जो मूल अपराध की राशि से बिल्कुल मेल नहीं खातीं, बशर्ते उनका संबंध सिद्ध हो। इस दृष्टिकोण से जांच एजेंसियों को ऐसे संपत्तियों को जब्त करने की सुविधा मिलती है जो अपराध से जुड़े हों, चाहे उनका आंकड़ा सटीक न हो।
यह निर्णय देश भर में चल रही मनी‑लॉन्ड्रिंग जांचों पर असर डालेगा, क्योंकि अब अदालतें मात्र संख्यात्मक मेल के बजाय धन के मूल अपराध से संबंध पर अधिक ध्यान देंगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह ruling विधेयक के उद्देश्य के अनुरूप है, जो अपराधी वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए बनाया गया था।
यह मामला एक याचिका से उत्पन्न हुआ था, जिसमें आरोपी ने यह तर्क दिया था कि जप्त की गई राशि और मूल अपराध की राशि में अंकगणितीय मेल नहीं है। हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और भविष्य में पीएमएलए मामलों में इस सिद्धांत को स्थापित किया।
न्यायालय ने यह तर्क दिया कि पीएमएलए का उद्देश्य अवैध वित्तीय प्रवाह को रोकना है, इसलिए वह उन रक़मों को भी शामिल कर सकता है जो मूल अपराध की राशि से बिल्कुल मेल नहीं खातीं, बशर्ते उनका संबंध सिद्ध हो। इस दृष्टिकोण से जांच एजेंसियों को ऐसे संपत्तियों को जब्त करने की सुविधा मिलती है जो अपराध से जुड़े हों, चाहे उनका आंकड़ा सटीक न हो।
यह निर्णय देश भर में चल रही मनी‑लॉन्ड्रिंग जांचों पर असर डालेगा, क्योंकि अब अदालतें मात्र संख्यात्मक मेल के बजाय धन के मूल अपराध से संबंध पर अधिक ध्यान देंगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह ruling विधेयक के उद्देश्य के अनुरूप है, जो अपराधी वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए बनाया गया था।
यह मामला एक याचिका से उत्पन्न हुआ था, जिसमें आरोपी ने यह तर्क दिया था कि जप्त की गई राशि और मूल अपराध की राशि में अंकगणितीय मेल नहीं है। हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और भविष्य में पीएमएलए मामलों में इस सिद्धांत को स्थापित किया।