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अपराध
झारखंड हाई कोर्ट ने कहा: प्रतिरोध के संकेत न होने से यौन शोषण पीड़िता की विश्वसनीयता नहीं घटती
✍️ Live Law
🗓 08 अक्टू. 2026, 04:01 AM
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झारखंड हाई कोर्ट ने कहा कि प्रतिरोध के संकेत न होने से यौन शोषण पीड़िता की गवाही को अस्वीकार नहीं किया जा सकता, जिससे पीड़ित‑सहायक न्याय सिद्धांत मजबूत हुआ।
झारखंड हाई कोर्ट की एक पीठ ने यह स्पष्ट किया कि यौन शोषण की घटना में पीड़िता द्वारा प्रतिरोध के संकेत न दिखाने को उसकी गवाही को अस्वीकार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि न्याय को शारीरिक प्रतिरोध की अपेक्षा के बजाय घटना की वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित होना चाहिए।
पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि प्रतिरोध की मांग करना पीड़िता पर अनुचित बोझ डालता है और उच्च न्यायालयों द्वारा स्थापित पीड़ित‑सहायक सिद्धांतों के विरुद्ध है। गवाही की विश्वसनीयता का मूल्यांकन संपूर्ण साक्ष्य के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल शारीरिक संघर्ष की उपस्थिति पर।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को सुदृढ़ करता है, जो यौन अपराध मामलों में संवेदनशीलता बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं। यह राज्य के निचले न्यायालयों में समान मामलों के निपटारे को प्रभावित करने की संभावना रखता है।
निर्णय में पुलिस और जांच एजेंसियों से भी अनुरोध किया गया है कि वे पीड़ित‑केंद्रित दृष्टिकोण अपनाएँ और प्रश्न पूछते समय पुराने प्रतिरोध के मानदंडों पर निर्भर न रहें, जिससे देश भर में यौन अपराधों की जांच में सुधार हो सके।
पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि प्रतिरोध की मांग करना पीड़िता पर अनुचित बोझ डालता है और उच्च न्यायालयों द्वारा स्थापित पीड़ित‑सहायक सिद्धांतों के विरुद्ध है। गवाही की विश्वसनीयता का मूल्यांकन संपूर्ण साक्ष्य के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल शारीरिक संघर्ष की उपस्थिति पर।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को सुदृढ़ करता है, जो यौन अपराध मामलों में संवेदनशीलता बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं। यह राज्य के निचले न्यायालयों में समान मामलों के निपटारे को प्रभावित करने की संभावना रखता है।
निर्णय में पुलिस और जांच एजेंसियों से भी अनुरोध किया गया है कि वे पीड़ित‑केंद्रित दृष्टिकोण अपनाएँ और प्रश्न पूछते समय पुराने प्रतिरोध के मानदंडों पर निर्भर न रहें, जिससे देश भर में यौन अपराधों की जांच में सुधार हो सके।