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झारखंड उच्च न्यायालय ने मानसिक बीमारी के कारण तलाक के याचिका को खारिज किया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
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झारखंड उच्च न्यायालय ने मानसिक बीमारी के कारण तलाक के याचिका को खारिज किया

✍️ The Indian Express 🗓 24 जुल. 2026, 08:06 AM 👁 66
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झारखंड उच्च न्यायालय ने एक पति द्वारा दायर तलाक की याचिका को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि साथी की मानसिक बीमारी तलाक का वैध आधार नहीं है।

झारखंड उच्च न्यायालय ने एक पति द्वारा दायर तलाक की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी पत्नी की मानसिक बीमारी को तलाक का कारण बताया था। न्यायालय ने माना कि साथी की स्वास्थ्य स्थिति, चाहे कितनी भी गंभीर क्यों न हो, तलाक के वैध आधार के रूप में स्वीकार्य नहीं है।

निर्णय में यह स्पष्ट किया गया कि भारतीय कानून के तहत तलाक के लिए क्रूरता, व्यभिचार या परित्याग जैसे अधिक ठोस कारण आवश्यक हैं। याचिका को खारिज कर दिया गया और पक्षों को परामर्श और अन्य वैधानिक उपायों की सलाह दी गई। यह फैसला दर्शाता है कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं को तलाक के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय पूर्ववर्ती मामलों के अनुरूप है, जहाँ न्यायालयों ने लगातार यह रुख अपनाया है कि मानसिक स्वास्थ्य अकेले ही वैवाहिक बंधन को समाप्त नहीं कर सकता। यह निर्णय क्षेत्र में समान याचिकाओं पर प्रभाव डाल सकता है।

यह मामला यह याद दिलाता है कि न्यायपालिका मानसिक स्वास्थ्य को संवेदनशीलता से देखती है, परंतु उसे वैवाहिक विघटन के बराबर नहीं मानती। इस निर्णय से क्षेत्र में इसी तरह के मामलों में स्पष्ट मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।
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