📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
स्थानीय
झारखंड हाई कोर्ट ने पारस्परिक सहमति तलाक का आदेश रद्द किया
✍️ Live Law
🗓 26 अक्टू. 2026, 05:46 PM
👁 17
झारखंड हाई कोर्ट ने पारस्परिक सहमति तलाक का आदेश रद्द कर दिया, यह कहा कि जब सहमति या वैधानिक शर्तें पूरी नहीं होतीं तो अपील दायर की जा सकती है।
झारखंड हाई कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे तलाक के आदेश को रद्द कर दिया जो दोनों पक्षों की पारस्परिक सहमति पर जारी किया गया था। कोर्ट ने कहा कि जब तलाक के लिये आवश्यक वैधानिक शर्तें या प्रक्रिया पूरी नहीं हुई होती तो ऐसा आदेश मान्य नहीं हो सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पारस्परिक सहमति तलाक के आदेश के विरुद्ध अपील तभी दायर की जा सकती है जब दोनों पक्षों की सहमति अनुपलब्ध हो या वैधानिक शर्तें उल्लंघित हों। यह दृष्टिकोण परिवार कानून की उन प्रावधानों के अनुरूप है जो किसी भी पक्ष के दबाव या धोखे से तलाक को रोकते हैं।
कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला तलाक की कार्यवाही में न्यायालय की निगरानी को मजबूत करेगा और झारखंड के निचले स्तर के न्यायालयों को पारस्परिक सहमति तलाक देने में अधिक सतर्कता बरतने के लिए प्रेरित करेगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पारस्परिक सहमति तलाक के आदेश के विरुद्ध अपील तभी दायर की जा सकती है जब दोनों पक्षों की सहमति अनुपलब्ध हो या वैधानिक शर्तें उल्लंघित हों। यह दृष्टिकोण परिवार कानून की उन प्रावधानों के अनुरूप है जो किसी भी पक्ष के दबाव या धोखे से तलाक को रोकते हैं।
कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला तलाक की कार्यवाही में न्यायालय की निगरानी को मजबूत करेगा और झारखंड के निचले स्तर के न्यायालयों को पारस्परिक सहमति तलाक देने में अधिक सतर्कता बरतने के लिए प्रेरित करेगा।