📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
अपराध
झारखंड हाई कोर्ट ने भाषा समझ न आने पर जीवनकैदी को बरी किया
✍️ India Today
🗓 29 अक्टू. 2026, 01:12 AM
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झारखंड हाई कोर्ट ने जीवनकैदी की सजा रद्द कर दी, क्योंकि पूछताछ ऐसी भाषा में हुई थी जिसे वह नहीं समझता था, जिससे सबूत अमान्य हो गया।
झारखंड हाई कोर्ट ने एक जीवनकैदी की सजा को रद्द कर दिया, क्योंकि उसके खिलाफ किए गए पूछताछ में वह भाषा उपयोग की गई थी जिसे वह नहीं समझता था। कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में प्राप्त बयानों को निष्पक्ष परीक्षण और कानूनी प्रक्रिया के सिद्धांतों का उल्लंघन माना जाता है।
न्यायालय ने यह भी नोट किया कि पूछताछ के दौरान आरोपी को अनुवाद या दुभाषिया की सुविधा नहीं दी गई, जिससे उसके बयानों की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं। इस कारण सबूत को अमान्य ठहराते हुए कैदी को बरी किया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है कि अभियुक्त को पूछताछ की भाषा समझ में आए, जिससे भारत में पुलिस प्रक्रिया में संवैधानिक सुरक्षा को मजबूती मिलती है।
न्यायालय ने यह भी नोट किया कि पूछताछ के दौरान आरोपी को अनुवाद या दुभाषिया की सुविधा नहीं दी गई, जिससे उसके बयानों की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं। इस कारण सबूत को अमान्य ठहराते हुए कैदी को बरी किया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है कि अभियुक्त को पूछताछ की भाषा समझ में आए, जिससे भारत में पुलिस प्रक्रिया में संवैधानिक सुरक्षा को मजबूती मिलती है।