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22 अक्टू. 2026•
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झारखंड हाई कोर्ट ने मौखिक विभाजन को मौखिक साक्ष्य और दीर्घकालिक कब्जे से मान्य किया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
देश

झारखंड हाई कोर्ट ने मौखिक विभाजन को मौखिक साक्ष्य और दीर्घकालिक कब्जे से मान्य किया

✍️ livelaw.in 🗓 04 सित. 2026, 01:33 PM 👁 58
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झारखंड हाई कोर्ट ने कहा कि संपत्ति का मौखिक विभाजन मौखिक गवाही और दीर्घकालिक अलग-अलग कब्जे के प्रमाण से सिद्ध किया जा सकता है।

झारखंड हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि संपत्ति का मौखिक विभाजन भी न्यायालय में सिद्ध किया जा सकता है। न्यायालय ने कहा कि जब मौखिक गवाही को दीर्घकालिक और निरंतर अलग-अलग कब्जे के प्रमाणों से समर्थन मिलता है, तो वह विभाजन स्थापित करने के लिये पर्याप्त है।

यह निर्णय एक ऐसी याचिका से आया था जिसमें लिखित समझौते के बिना किए गए विभाजन की वैधता पर सवाल उठाया गया था। कोर्ट ने तथ्यात्मक स्थिति का विश्लेषण किया और पाया कि पक्षकार कई वर्षों से अलग-अलग हिस्सों पर स्वतंत्र रूप से नियंत्रण रख रहे थे, जिससे विभाजन का अस्तित्व स्पष्ट हो गया।

मौखिक गवाही और निरंतर अलग-अलग कब्जे को स्वीकार कर कोर्ट ने एक ऐसा मिसाल स्थापित किया जो कई वारिसी और पारिवारिक विवादों में प्रभावी हो सकता है, जहाँ लिखित दस्तावेज़ नहीं होते।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला कब्जे को स्वामित्व अधिकारों के ठोस संकेतक के रूप में महत्व देता है, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध‑शहरी क्षेत्रों में जहाँ अनौपचारिक समझौते आम हैं।

निर्णय यह भी दोहराता है कि लिखित दस्तावेज़ प्राथमिक प्रमाण होते हैं, परन्तु यदि तथ्यात्मक परिस्थितियाँ पक्षों की मंशा और व्यवहार को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं तो न्यायालय मौखिक विभाजन को नज़रअंदाज़ नहीं करेगा।
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