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झारखंड हाई कोर्ट ने कहा, नीलामी से खरीदा संपत्ति अकेले किरायेदारों को नहीं निकाल सकती
✍️ Live Law
🗓 19 सित. 2026, 01:45 PM
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झारखंड हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि नीलामी में खरीदी गई संपत्ति केवल किरायेदारों को बाहर निकालने का आधार नहीं बन सकती।
झारखंड हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि नीलामी के माध्यम से संपत्ति का अधिग्रहण ही किरायेदारों को बाहर निकालने का अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा किरायेदारों के अधिकार तब तक बरकरार रहते हैं जब तक कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित निकासी आदेश नहीं जारी किया जाता।
निर्णय यह रेखांकित करता है कि स्वामित्व का परिवर्तन स्वचालित रूप से किरायेदारी या लीज़ को समाप्त नहीं करता, विशेषकर किराया नियंत्रण अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत। किरायेदारों को हटाने के लिए नोटिस और सुनवाई के बाद ही वैध निकासी आदेश आवश्यक है।
वकीलों ने कहा कि यह फैसला किरायेदारों की सुरक्षा को सुदृढ़ करता है और नीलामी बिक्री को संपत्ति साफ़ करने के शॉर्टकट के रूप में उपयोग करने से रोकता है। यह निर्णय राज्य भर में नीलामी संपत्तियों से जुड़े भविष्य के विवादों में मार्गदर्शक होगा।
हाई कोर्ट ने निचली अदालतों को भी इस सिद्धांत को समान रूप से लागू करने का निर्देश दिया, जिससे संपत्ति खरीदारों को कब्जा लेने से पहले वैधानिक किरायेदारी प्रावधानों का सम्मान करना पड़े।
यह आदेश झारखंड के तेज़ी से शहरीकरण वाले क्षेत्रों में किरायेदारों के अधिकारों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है, जहाँ संकटग्रस्त संपत्तियों की नीलामी अधिक हो रही है।
निर्णय यह रेखांकित करता है कि स्वामित्व का परिवर्तन स्वचालित रूप से किरायेदारी या लीज़ को समाप्त नहीं करता, विशेषकर किराया नियंत्रण अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत। किरायेदारों को हटाने के लिए नोटिस और सुनवाई के बाद ही वैध निकासी आदेश आवश्यक है।
वकीलों ने कहा कि यह फैसला किरायेदारों की सुरक्षा को सुदृढ़ करता है और नीलामी बिक्री को संपत्ति साफ़ करने के शॉर्टकट के रूप में उपयोग करने से रोकता है। यह निर्णय राज्य भर में नीलामी संपत्तियों से जुड़े भविष्य के विवादों में मार्गदर्शक होगा।
हाई कोर्ट ने निचली अदालतों को भी इस सिद्धांत को समान रूप से लागू करने का निर्देश दिया, जिससे संपत्ति खरीदारों को कब्जा लेने से पहले वैधानिक किरायेदारी प्रावधानों का सम्मान करना पड़े।
यह आदेश झारखंड के तेज़ी से शहरीकरण वाले क्षेत्रों में किरायेदारों के अधिकारों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है, जहाँ संकटग्रस्त संपत्तियों की नीलामी अधिक हो रही है।