📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
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झारखंड उच्च न्यायालय: मानसिक विकार अकेले तलाक का आधार नहीं
✍️ The Times of India
🗓 30 जुल. 2026, 12:37 PM
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झारखंड उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि मानसिक विकार अकेले तलाक का आधार नहीं हो सकता, इसके लिए वैवाहिक टूटने के अन्य कारण भी आवश्यक हैं।
झारखंड उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि मानसिक विकार अकेले तलाक का आधार नहीं हो सकता, इसके लिए वैवाहिक टूटने के अन्य कारण भी आवश्यक हैं।
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को अन्य कारकों, जैसे कि अत्याचार या परित्याग, के साथ मिलाकर ही तलाक के वैधता का आकलन किया जाना चाहिए।
यह रुख भारत के अन्य न्यायालयों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मामलों के मूल्यांकन पर प्रभाव डालने की उम्मीद है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय वैवाहिक विघटन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देता है।
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को अन्य कारकों, जैसे कि अत्याचार या परित्याग, के साथ मिलाकर ही तलाक के वैधता का आकलन किया जाना चाहिए।
यह रुख भारत के अन्य न्यायालयों में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मामलों के मूल्यांकन पर प्रभाव डालने की उम्मीद है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय वैवाहिक विघटन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देता है।